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Tag: बीमारियां

तिब्बती चिकित्सा पद्धति से ऐसे ठीक हो जाती हैं गंभीर बीमारियां

तिब्बती चिकित्सा पद्धति से ऐसे ठीक हो जाती हैं गंभीर बीमारियां

Health
सोवा रिग्पा, तिब्बत सहित हिमालयी क्षेत्रों में प्रचलित प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। भारत के हिमालयी क्षेत्र में 'तिब्बती' या 'आमचि' के नाम से जानी जाने वाली सोवा-रिग्पा विश्व की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धतियों में से एक है। भारत में इस पद्धति का प्रयोग जम्मू-कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र, लाहौल-स्पीति (हिमाचल प्रदेश), सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश तथा दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) में किया जाता है। सोवा-रिग्पा के सिद्धांत और प्रयोग आयुर्वेद की तरह ही हैं और इसमें पारंपरिक चीनी चिकित्सा विज्ञान के कुछ सिद्धांत भी शामिल हैं। सोवा रिग्पा के चिकित्सक देखकर, छूकर एवं प्रश्न पूछकर इलाज करते हैं। एक तरह से बहुत ही कारगर पद्धति है। यह विधा भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की तरह है, जिसमें इलाज के लिए जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है। देश के कई शहरों में इसके 5० से ज्यादा उपचार केंद्र हैं। रोगों की पहचान इस विधा
हर मर्ज की एक दवा है आंवला, नहीं होतीं ये सात बड़ी बीमारियां

हर मर्ज की एक दवा है आंवला, नहीं होतीं ये सात बड़ी बीमारियां

Health
आंचले का सीजन फिर शुरू हो चुका है। बाजार में आंवला नजर आने लगा है। यूं तो आंवले का सेवन सालभर कई तरीकों से किया जा सकता है, लेकिन जब इसका सीजन आता है, तब हर रोज सुबह एक कच्चा आंवला चबाकर पानी पीने से इसके कई फायदे होते हैं। कहते हैं कि महज कुछ ही दिनों में आंखों के नीचे से काले धब्बे गायब हो जाते हैं। सफेद बाल काले होने लगते हैं। स्किन में चमक आ जाती है। वैसे आंवले के बारे में एक बात बहुत मशहूर है। वह है-'बुजुर्गों की बात और आंवले के स्वाद का पता बाद में चलता है।' जी हां, इसमें कोई दोराय नहीं कि आंवला बेहद गुणकारी है, इसलिए इसे हर मर्ज की दवा भी कहा जाता है। आंवला पाचन तंत्र से लेकर याददाश्त को दुरुस्त करता है। नियमित रूप से आंवले का सेवन करने से बुढ़ापा भी दूर रहता है। मधुमेह, बवासीर, नकसीर, दिल की बीमारी जैसी समस्याओं का इलाज आंवले में छिपा है। आइए हम आपको बताते हैं कि आंवला आपकी सेहत के
गोलगप्पे खाने से ठीक हो सकती हैं ये बीमारियां, आपने ट्राय किया

गोलगप्पे खाने से ठीक हो सकती हैं ये बीमारियां, आपने ट्राय किया

Health
ऐसा शायद ही कोई हो जिसे गोलगप्पे पसंद न हों। भारत के किसी भी शहर में चले जाओ, गोलगप्पे जरूर मिल जाएंगे। हालांकि इनका स्वाद हर जगह अलग ही मिलेगा। वजह है हर जगह के पानी का स्वाद अलग होना और इन्हें बनाने के तरीके में फर्क। कई लोग तो गोलगप्पे के इतने शौकीन होते हैं कि उन्हें यह भी पता होता है कि किसी गली या किस ठेले वाले के गोलगप्पे सबसे ज्यादा स्वादिष्ट होते हैं। क्या आप जानते हैं कि ऐसी बहुत सी बीमारियां हैं जिनका इलाज गोलगप्पे हो सकते हैं। जी हां, ऐसी बहुत सी छोटी मोटी बीमारियां हैं, जिनमें गोलगप्पे खाने से फायदा होता है। हालांकि गोलगप्पे किस तरीके से बनाए गए हैं और इनमें किन किन इन्ग्रीडिएंट्स का इस्तेमाल किया गया है, इसका बड़ा महत्व है। यहां पढ़ें गोलगप्पे खा कर कौन सी बीमारियों से पा सकते हैं छुटकारा - मुंह के छाले अगर आपके मुंह में छाले हो गए हैं तो एक प्लेट गोलगप्पे खा लीजिए। असल में ग
रेजर इस्‍तेमाल करते समय बरतें सावधानी, हो सकती हैं ये जानलेवा बीमारियां

रेजर इस्‍तेमाल करते समय बरतें सावधानी, हो सकती हैं ये जानलेवा बीमारियां

Health
रेजर से दाढ़ी बनाना तो रोज का काम है। मगर आपको पता है कि रोज इस्‍तेमाल होने वाला रेजर कितनी खतरनाक और गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इन बीमारियों की वजह से जान भी जा सकती है। दाढ़ी बनाने के... Live Hindustan Rss feed
नींद पूरी लें क्योंकि अनिद्रा लाती है बीमारियां

नींद पूरी लें क्योंकि अनिद्रा लाती है बीमारियां

Health
भागदौड़ भरी जीवनशैली और काम के बोझ का असर नींद पर पड़ रहा है। दिनभर की थकान के बावजूद तनाव का बढ़ता स्तर स्लीपिंग पैटर्न यानी सोने के समय और उसकी अवधि पर असर डाल रहा है। कई शोध मेंं भी सामने आ चुका है कि अनिद्रा की समस्या वजन बढऩे और हार्ट डिजीज का कारण बन सकती है। ऐसे में जरूरी है इसके कारणों को जाना जाए ताकि लाइफस्टाइल में बदलाव किया जा सके। एक व्यक्ति को औसतन ८ घंटे की नींद जरूरी है ताकि वह स्वस्थ रह सके। जानते अनिद्रा से जुड़ी कुछ खास बातें... क्यों जरूरी है नींदजिस तरह मशीन लंबे समय तक चलते-चलते अपना संतुलन खो देती है, उसी तरह हमारा शरीर भी एक समय के बाद आराम चाहता है। दिनभर में हुई थकान को दूर कर तन-मन को तरोताजा करती है नींद। अगर शरीर को आराम न मिले तो शारीरिक और मानसिक सिस्टम पर असर पडऩे लगता है। इम्यून और नर्वस सिस्टम को नॉर्मल रखने, बीमारियों से लडऩे के लिए नींद जरूरी है। नींद से
कहीं आपको तो नहीं, 20 की उम्र में 40 की बीमारियां

कहीं आपको तो नहीं, 20 की उम्र में 40 की बीमारियां

Health
आज की युवा पीढ़ी हाइपर टेंशन, मानसिक तनाव, एसिडिटी आदि कई समस्याओं से परेशान है। पहले ये समस्याएं 40 साल की उम्र के बाद होती थीं लेकिन अब खराब जीवनशैली के कारण ये समस्याएं 20 वर्ष के युवाओं में भी नजर आने लगी है। क्या आपकी उम्र 20 वर्ष है? या बेटे या बेटी की उम्र 20 वर्ष के करीब है? ऐसे में आप सबसे ज्यादा टेंशन बच्चे के कॅरियर के बारे में करते हैं। हो सकता है कि आप सही हों लेकिन आपको अपने बच्चे के कॅरियर के साथ-साथ उसकी सेहत पर भी ध्यान देना चाहिए। अब 20 वर्ष की उम्र में कदम रखने वाले युवाओं को ऐसी बीमारियां और समस्याएं हो रही हैं जो पहले 40 वर्ष की उम्र के लोगों को हुआ करती थीं। अब डॉक्टरों के पास जाने वाले लोगों में युवाओं की संख्या बढ़ रही है। गलत खानपान का असर आज के युवा स्वाद के चक्कर में पोषक तत्वों से भरपूर खानपान की बजाय कुछ भी उल्टा-सीधा जैसे चिप्स, नूडल्स, मोमोज आदि खाना पसंद करत
मानसून: मौसम सुहाना पर साथ आई कई बीमारियां, बारिश के पानी से रहें सावधान

मानसून: मौसम सुहाना पर साथ आई कई बीमारियां, बारिश के पानी से रहें सावधान

Health
बरसात के मौसम में वायरल तेजी के साथ फैलता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है इसलिए इससे बचने के लिए रोगी व्यक्ति से संपर्क नहीं रखना चाहिए। बरसात के मौसम में डेंगू फैलने की संभावना... Live Hindustan Rss feed
कई बीमारियां बताती एमआरआई

कई बीमारियां बताती एमआरआई

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एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल मस्तिष्क, हड्डियों व मांसपेशियों, सॉफ्ट टिश्यू, चेस्ट, ट्यूमर-कैंसर, स्ट्रोक, डिमेंशिया, माइग्रेन, धम नियों के ब्लॉकेज और जेने टिक डिस्ऑर्डर का पता लगाने में होता है । बीमारी की सटीक जान कारी के लिए यह जांच होती है । पहली बार एम आर आई का प्रयोग वर्ष १९७७ में कैंस र की जांच में हुआ था । क्या है एम आर आई मैग्ने टिक रेजोनेंस इमेजिंग (एम आर आई) मशीन बॉडी को स्कैन कर अंग के किस हिस्से में दिक्कत है, की जान कारी देती है । इसमें मैग्ने टिक फील्ड व रेडियो तरंगों का इस्ते माल किया जाता है जो शरीर के अंदर के अंगों की विस्ता र से इमेज तैयार करती हैं । क्या है तकनीक शरीर में सबसे अधिक पानी होता है । पानी के हर मॉलिक्यूल में दो हाइ ड्रोजन प्रोटोन होते हैं । एम आर आई स्कैनिंग के दौरान पावर फुल मैग्ने टिक फील्ड बनता है । हाइड्रो जन के प्रोटोन मैग्ने टिक फील्ड से जुडक़र शरीर के अंग
बीमारियां जो बढ़ातीं एड़ी की परेशानी

बीमारियां जो बढ़ातीं एड़ी की परेशानी

Health
अक्सर हम पैरों में लगी हल्की-फुल्की चोट या दर्द को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा करना कई बार गंभीर भी हो सकता है क्योंकि कुछ मामलों में पैरों का दर्द बढक़र घुटनों व कमर को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हड्डियों की परेशानियों में से २५-३० प्रतिशत समस्याएं केवल पैरों व एडिय़ों की होती हैं। आम तकलीफ पैर या एड़ी मेंं फे्रक्चर, दर्द, लिगामेंट इंजरी, पैरों की विकृति और फ्लैट फुट आदि। डायबिटीज, स्पोंडिलाइटिस, आर्थराइटिस, ओस्टियोपोरोसिस और पोलियो से पीडि़त मरीजों को पैर व एड़ी की समस्याएं अधिकहोती हैं।   चोट है बड़ी वजह पैरों और एडिय़ों की ज्यादातर समस्याएं चोट के कारण होती हंै। इन परेशानियों से जुड़े कुल मामलों में लगभग ५० प्रतिशत फे्रक्चर व लिगामेंट इंजरी के होते हैं। ५०त्न फे्रक्चर व लिगामेंट इंजरी के होते हैं। २५-३०त्न समस्याएं केवल पैरों व एडिय़ों की होती हैं। ड
बच्चों में होने वाली दुर्लभ बीमारियां

बच्चों में होने वाली दुर्लभ बीमारियां

Health
भारत में सात करोड़ से अधिक आबादी प्रोजेरिया और डिस्लेक्सिया जैसी दुर्लभ बीमारियों (रेयर डिजीज) से पीडि़त है। प्रोजेेरिया के बारे में फिल्म ‘पा’ और डिस्लेक्सिया पर ‘तारे जमीं पर’ फिल्म से लोगों में थोड़ी जागरुकता आई लेकिन ऐसी ६८०० से अधिक रेयर डिजीज और भी हैं जिनके बारे में हम जानते भी नहीं। दुनियाभर में लगभग ३५ करोड़ लोग इनसे पीडि़त हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के जन्म के समय सचेत रहें तो कुछेक का इलाज संभव है। अल्ट्रा रेयर डिजीज अलग-अलग देशों में इसके अलग-अलग मानक हैं। भारत में दस हजार की आबादी में किसी एक को होने वाली बीमारी को रेयर जबकि एक लाख की आबादी में से दो लोगों को होने वाली बीमारी को अल्ट्रा रेयर डिजीज कहते हैं। ये हैं लक्षण दौरा या बेहोशी। शरीर में अकडऩ या शिथिलता। बार-बार बिना वजह उल्टी। शरीर या पेशाब से तेज दुर्गंध। त्वचा में बदलाव या दाने न