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Tag: रोगों

कमरदर्द बन सकता है कई रोगों का कारण

कमरदर्द बन सकता है कई रोगों का कारण

Health
स्पाइनलडिस्क प्रोलैप्स युवावस्था से ही रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करने लगती है और भविष्य में स्पाइनल आर्थराइटिस का कारण बनती है। हर वर्ग व उम्र के लोगों को परेशान करने वाली समस्या है कमरदर्द जो खासकर निचले हिस्से में ज्यादा होती है। यह दर्द लंबे समय तक बना रहे तो रीढ़ की हड्डी में आर्थराइटिस का रूप ले लेता है। लेकिन बार-बार यदि कोई इससे पीडि़त होता है तो यह आर्थराइटिस के साथ किडनी या अन्य अंगों से जुड़े रोगों की आशंका को भी बढ़ा देता है। प्रमुख वजह -कभी-कभार होने वाला कमरदर्द बैठने, उठने, चलने व सोने के गलत तरीके व अचानक अधिक वजन उठाने से होता है, जो 10-15 दिन तक सावधानी बरतें तो ठीक भी हो जाता है। लेकिन यदि इन आदतों के अलावा शारीरिक गतिविधियों का अभाव बना रहे तो स्पाइनलडिस्क प्रोलैप्स (रीढ़ कीडिस्क पीछे की तरफ बढऩा) की समस्या हो सकती है। लक्षण -कमर की मांसपेशियों में खिंचाव, अकड़न, चुभन, च
महिलाओं के रोगोंं का इलाज करने के लिए कारगर हैं ये दवाएं

महिलाओं के रोगोंं का इलाज करने के लिए कारगर हैं ये दवाएं

Health
पुरुषों की तुलना में महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं ज्यादा होती हैं। जिसके चलते उन्हें कई परेशानियों का सामना बार-बार करना पड़ता है। इनमें होम्योपैथी इलाज मददगार है। जानते हैं ऐसी ही कुछ समस्याओं व इलाज के बारे में- मेनोरेजिया : इम्युनिटी कमजोर होने से यदि किसी तरह का संक्रमण सेहत को प्रभावित करे तो माहवारी के दौरान अत्यधिक रक्तस्त्राव होना महिलाओं में आम है। इसकी वजह पेल्विक इंफ्लामेट्री डिस्ऑर्डर (पीआईडी) भी हो सकता है। फेरीनोसा, बोरैक्स, कॉलोफाइलम आदि दवा लेने की सलाह देते हैं। स्केंटी मेन्स्ट्रूएशन : क्रॉनिक रोग जैसे टाइफॉयड, टीबी की वजह से खून की कमी से कुछ महिलाओं में माहवारी के दौरान सामान्य से कम व ज्यादा रक्तस्त्राव होता है जो आगे चलकर विभिन्न रोगों को जन्म देता है। यह स्केंटी मेन्स्ट्रूएशन स्थिति होती है। इसके लिए फैरममैट, सीपिया, नैट्रम म्यूर दवाओं से इलाज होता है। डिसमेनो
कई रोगों से लड़ने में कारगर है केला

कई रोगों से लड़ने में कारगर है केला

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यह वजन बढ़ाने और वजन घटाने में भी सक्षम हैकेला कई सारे रोग से लड़ने में सहायता करता है। केला हमारी त्वचा संबंधित अनेक परेशानियों को भी ठीक करता है। यह वजन बढ़ाने और वजन घटाने में भी सक्षम है। ब्लड शुगर रखे नियंत्रितकेले में प्राकृतिक शुगर पाई जाती है इसी कारण यह हमारे शरीर में ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रण में रखता है या सामान्य रखता है आर्टिफिशियल शुगर हमारे शरीर में शुगर की मात्रा को एकदम से बढ़ा देता है जो हमारी सेहत के लिए काफी नुकसानदेह होने के साथ-साथ जानलेवा भी हो सकता है।डिप्रेशन की समस्या का करें इलाजकेले में पर्याप्त मात्रा में टाइकोफैन नामक पदार्थ मौजूद होता है जो हमें तनाव, डिप्रेशन से लड़ने में काफी मदद करता है।ऊर्जा से भरपूर केला ऊर्जा से भरपूर केला कई रोगों में लड़ने के साथ विटामिन और मिनरल प्रदान करता है। प्रतिदिन एक केला एक गिलास दूध के साथ लेना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। इ
हृदय रोगों के लिए फायदेमंद है ये आयुर्वेदिक औषधि

हृदय रोगों के लिए फायदेमंद है ये आयुर्वेदिक औषधि

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अर्जुन एक औषधीय पेड़ है जो भारत में आसानी से पाया जाता है। इसे घवल, ककुभ और नदीसर्ज आदि नामों से भी जाना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार यह हृदय रोग के इलाज में लाभकारी है। इसकी छाल (त्वक) से बने चूर्ण को हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, अत्यधिक रक्तस्त्राव व अन्य रोगों में काफी उपयोगी माना गया है। अर्जुन की छाल अंदर से लाल रंग की होती है और पेड़ से उतारने पर चिकनी चादर की तरह उतरती है। हाई ब्लड प्रेशर -तीन ग्राम चूर्ण की मात्रा सुबह-शाम दूध के साथ लेने से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या में आराम मिलता है। अर्जुन की छाल की चाय - चायपत्ती की बजाय अर्जुन की छाल को पानी में उबालकर उसमें दूध व चीनी डालकर पीना हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर व कोलेस्ट्रॉल में फायदेमंद है। इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। कम करे कोलेस्ट्रॉल - एक कप पानी में तीन ग्राम अर्जुन की छाल का चूर्ण डालकर उबालें। पानी की मात्रा आ
रोगों से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

रोगों से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

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मच्छर : डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया फैलाने वाले मच्छर इस मौसम में तेजी से पनपने लगते हैं और रोगों का कारण बनते हैं। मक्खी : मक्खी या अन्य प्रकार के कीट गंदे स्थानों पर बैठते हैं और फिर खानपान की चीजों को प्रदूषित कर उल्टी, दस्त, पेटदर्द व पीलिया जैसी बीमारियों की वजह बनते हैं।दूषित खानपान : सड़े-गले फल और सब्जियां टायफॉइड, उल्टी, दस्त, पेटदर्द व पीलिया (हेपेटाइटिस-ए व ई) का कारण बनती हैं।प्रमुख सावधानियां : फल और सब्जियां खरीदते समय ध्यान दें कि वे साफ-सुथरी व सड़ी या गली हुई न हों। इन्हें प्रयोग में लेने या फ्रिज में स्टोर करने से पहले अच्छी तरह धोना चाहिए।पूरी तरह से पका हुआ भोजन खाएं। पके हुए भोजन को फ्रिज में रखने की व्यवस्था न हो तो सात से आठ घंटे के बाद इसे न खाना ही बेहतर होगा।दूध व दूध से बनी चीजों को 24 घंटे के भीतर की इस्तेमाल कर लें जैसे पनीर, दही आदि।खानपान की चीजों को अच्छी त
रिजका है कई रोगों में फायदेमंद

रिजका है कई रोगों में फायदेमंद

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क्षारीयपन अन्य वनस्पतियों से लगभग 6 गुना ज्यादा होता हैरिजका में क्लोरोफिल की अधिकता होने के कारण इसमें क्षारीयपन अन्य वनस्पतियों से लगभग 6 गुना ज्यादा होता है। जिन्हें एसिडिटी, मोटापा, कब्ज है उनके लिए अंकुरित रिजके का प्रयोग फायदेमंद होता है। रिजका मूत्राशय की सूजन, गुर्दों की खराबी में फायदेमंद है। अंकुरित रिजका शरीर में चर्बी को कम करने का सशक्त माध्यम है। यह गठिया-रक्तचाप जैसे रोगों में टॉनिक का काम करता है। इसका प्रयोग करते समय गरिष्ठ भोजन से परहेज रखना चाहिए। ताजा रिजका की पत्तियों में स्टीरॉल पाया जाता है जो पुरुष में टेस्टोस्टेरॅान की मात्रा बढ़ाता है, जिससे शरीर में स्फूर्ति बढ़ाता है। यह आयरन से भरपूर है, यदि गर्भवती स्त्री को प्रतिदिन 20 से 30 ग्राम अंकुरित रिजका अनार के साथ खिलाया जाए, तो खून व कैल्शियम की कमी दूर होती है। वैद्य कैलाश चंद्र शर्मा(नोट: किसी भी तरह की औषधि लेने
इलायची देगी गले के दर्द में आराम, रोगों से लड़ने की ताकत देगा जिंक

इलायची देगी गले के दर्द में आराम, रोगों से लड़ने की ताकत देगा जिंक

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सेहत और स्वाद दोनों को सही बनाए रखने में इलायची बेहद उपयोगी है। छोटी और बड़ी दोनों इलायची के फायदे इस प्रकार हैं- सुबह-शाम छोटी इलायची चबाने से गले में दर्द, खराश या अन्य समस्याओं में लाभ होता है।गले में यदि सूजन हो तो मूली के रस में छोटी इलायची पीसकर लेने से आराम मिलेगा।सर्दी-जुकाम, खांसी और छींकें आने पर छोटी इलायची के साथ अदरक का टुकड़ा, एक लौंग और तुलसी के पत्तों को पान में लपेटकर खा सकते हैं।पांच ग्राम बड़ी इलायची को आधा लीटर पानी में उबाल लें। एक चौथाई पानी रहने पर गुनगुना पिएं, इससे उल्टी आनी बंद हो जाएगी।मुंह के छालों के लिए पिसी इलायची को मिश्री के साथ मिलाकर ले सकते हैं। इस मिश्रण के अलावा छोटी इलायची को थोड़ी देर मुंह में रखकर चूसने से भी चक्कर आने की समस्या में आराम मिलेगा। मर्ज से लड़ने की ताकत देता जिंक - वृ द्धावस्था में रोगों का खतरा बढ़ने की एक वजह उनमें जिंक का स्तर कम हो
कई गंभीर रोगों में भी फायदेमंद है पंचगव्य,जानें इसके फायदे

कई गंभीर रोगों में भी फायदेमंद है पंचगव्य,जानें इसके फायदे

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आयुर्वेद में रोगों से मुक्ति के लिए पंचगव्य को औषधि के रूप में प्रयोग करते हैं। पंचगव्य देसी गाय से प्राप्त पांच चीजों का समूह है। इसमें गोदुग्ध (दूध), गोदधी (दही-छाछ), गोमेह (गोबर), गोघृत (घी) व गोमूत्र (मूत्र) शामिल हैं। सेहतमंद रहने के लिए पांचों को अलग-अलग और समूह, दोनों रूप में इस्तेमाल करते हैं। जानते हैं इसके बारे में- गोदुग्ध (दूध) - इस दूध में कैल्शियम, विटामिन बी-12, आयोडीन, पोटेशियम जैसे तत्त्व होते हैं। यह इम्युनिटी बढ़ाकर कोशिकाओं को ऊर्जा देता है। दिमाग, हड्डी और मांसपेशियों को मजबूत करता है। जिन्हें इस दूध से एलर्जी/अपच की समस्या हो वे न पिएं। दिन में दो बार एक गिलास की मात्रा में पी सकते हैं। गोमेह (गोबर)-गोबर के कंडों को जलाने से वातावरण शुद्ध होता है। साथ ही इसमें मौजूद अर्क से तैयार क्रीम एक्जिमा, एलर्जी जैसे त्वचा रोगों में प्रयोग होती है। यह एंटीसेप्टिक, एंटीबैक्टीरियल
हड्डी के रोगों से बचाए विटामिन ‘K’

हड्डी के रोगों से बचाए विटामिन ‘K’

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हमारे शरीर में खून के थक्के बनाने का काम विटामिन-के करता है। इससे चोट लगने या किसी अन्य कारण से रक्तस्त्राव रुकता है। रक्त जमने की प्रक्रिया के दौरान विटामिन-के विभिन्न प्रोटीन, मिनरल्स और कैल्शियम को भी सक्रिय करता है। विटामिन-के हड्डियों को मजबूत करने के साथ धमनियों में कैल्शियम का जमाव रोकता है। इससे हृदय रोग व हृदयाघात का खतरा घटता है। विटामिन-के उम्र के बढ़ते प्रभाव को भी रोकता है। एक वयस्क पुरुष को हर रोज नियमित रूप से लगभग 120 माइक्रोग्राम और वयस्क महिला को 90 माइक्रोग्राम विटामिन-के लेना चाहिए। इसकी कमी से ये परेशानियां होती हैं- चोट लगने पर लंबे समय तक खून बहना।नाक या मसूड़ों से ब्लीडिंग।विटामिन-के की अत्यधिक कमी हो तो पाचनतंत्र में भी ब्लीडिंग होने लगती है।ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्त्राव, धमनियों का सख्त होना।पित्त की छोटी आंत की परेशानी, सिस्टिक फाइब्रोसिस। यूरिन में ब्लड आन
हृदय रोगों के लिए फायदेमंद है हरी सब्जियों का सेवन

हृदय रोगों के लिए फायदेमंद है हरी सब्जियों का सेवन

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विश्व की बढ़ती जनसंख्या के साथ हृदय से जुड़ी बीमारियों की चपेट में आकर मरने वालों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। पूरे विश्व में बीमारियों जैसे हृदयाघात, दिल का फेल होना या इससे संबंधित दूसरी बीमारियां समय से पहले मौत के आने का एक बड़ा कारण बन चुकी हैं। बीमारी का कारण - अति तनाव उच्च रक्तचाप को जन्म देता है। इसमें रक्त का दबाव लगातार 140/90 एमएम एचजी के स्तर से ज्यादा रहता है। उम्र बढ़ने के साथ हाईबीपी एक बड़ी समस्या बन जाती है। 60 से 69 साल के लोगों में यह 50 फीसदी पाया जाता है और 70 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों में यह 73 फीसदी हो जाता है। 55 साल के पुरुष और 65 साल की महिलाएं जिनमें कभी अति तनाव के लक्षण नहीं मिले, भविष्य में 90 फीसदी लोग इस बीमारी के जोखिम में घिर गए। विश्वभर के अनुमान बताते हैं कि करीब एक अरब से ज्यादा लोग ज्यादा तनाव से गुजर रहे हैं, जो हर साल 71 लाख लोगों की मौत क