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जानें मानसिक रोगों से जुड़े भ्रम और सच्चाई

जानें मानसिक रोगों से जुड़े भ्रम और सच्चाई

Health
शराब या अफीम जैसे पदार्थों के नशे से रोगी कुछ समय के लिए रोग के लक्षणों को भूल अवश्य जाता है लेकिन भविष्य में उसकी बीमारी के लक्षण अधिक तीव्र होकर सामने आते हैं। भ्रांति : मानसिक रोगों का उपचार केवल बाबाओं व तांत्रिकों द्वारा ही संभव है।तथ्य : मानसिक रोगों का उपचार तांत्रिकों, बाबाओं आदि के पास नहीं होता, बल्कि वे महज हमारी भावनाओं व आस्था का अनावश्यक फायदा उठाते हैं। सही पहचान और उचित मार्गदर्शन से मनोचिकित्सक मनोरोगों का उपचार करने में सक्षम होता है। भ्रांति : सभी मानसिक रोगों में उम्रभर दवा लेनी पड़ती है।तथ्य : बहुत कम रोगियों को लंबे समय तक उपचार लेना पड़ता है। लेकिन मानसिक परेशानी के अलावा ऐसे कई शारीरिक रोग जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अस्थमा भी हैं जिनमें लंबे समय तक या ताउम्र दवा लेनी पड़ सकती है। रोगी इन बीमारियों की चिकित्सा में खुद को प्रताडि़त महसूस नहीं करता। भ्रांति : इलेक्ट्रि
क्रोनिक किडनी रोगों काे बढ़ा रहा है वायु प्रदूषण

क्रोनिक किडनी रोगों काे बढ़ा रहा है वायु प्रदूषण

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बढ़ती जीवन प्रत्याशा व जीवनशैली की बीमारियों के प्रसार के साथ भारत में क्रोनिक किडनी रोग (सीकेडी) में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। चिकित्सकों का कहना है कि बढ़ता वायु प्रदूषण भी क्रोनिक किडनी रोगों के बढ़ते जोखिम का एक कारक है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सीकेडी की बढ़ती घटनाओं के साथ भारत में डायलिसिस से गुजरने वाले रोगियों की संख्या में भी हर साल 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। इस प्रतिशत में कई बच्चे भी शामिल हैं।दुर्भाग्य से, लगातार बढ़ती घटनाओं के बावजूद, गुर्दे की बीमारी को अभी भी भारत में उच्च प्राथमिकता नहीं दी जाती है। सीकेडी के उपचार और प्रबंधन का आर्थिक कारक भी रोगियों और उनके परिवारों के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय है। आकाश हेल्थकेयर में नेफ्रोलॉजी और रीनल प्रत्यारोपण के वरिष्ठ सलाहकार और निदेशक डॉ उमेश गुप्ता ने कहा, ''सीकेडी लाइलाज और बढ़ने वाली बीमारी है जो समय के साथ गुर्द
रिसर्च स्टोरी : छह घंटे से कम नींद से हृदय रोगों का खतरा

रिसर्च स्टोरी : छह घंटे से कम नींद से हृदय रोगों का खतरा

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रात में छह घंटे से कम सोने वाले पुरुषों में आठ घंटे सोने वालों की तुलना में हृदय रोगों का खतरा ज्यादा रहता है। अमरीकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित जर्नल में यह खुलासा हुआ। इस शोध में &,974 बैंक कर्मचारियों को शामिल किया गया। पाया गया कि छह घंटे से कम सोने वाले पुरुषों व आठ घंटे से कम सोने वाली महिलाओं में एथेरोस्क्लेरोसिस बीमारी का खतरा बढ़ता है। इससे धमनियों की दीवारों पर वसा, कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थ जमने लगते हैं। इससे हृदय रोगों की समस्या ज्यादा होती है। एक्सपर्ट कमेंट वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अरविंद पालावत के अनुसार अच्छे स्वास्थ्य के लिए 7-8 घंटे की गहरी नींद जरूरी है। कम नींद से रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ता है। इससे दिन में थकान बढती है। एकाग्रता में भी कमी आती है। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज की समस्या बढ़ती है। कम नींद की एक वजह तनाव भी है, जिससे व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव आता है
कई त्वचा रोगों के लिए फायदेमंद है ये मलहम व लेप, जानें इनके बारे में

कई त्वचा रोगों के लिए फायदेमंद है ये मलहम व लेप, जानें इनके बारे में

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शरीर पर कई बार घाव, कट व कुछ ऐसे त्वचा रोग हो जाते हैं जो काफी इलाज के बाद भी ठीक नहीं होते। ऐसे में जड़ीबूटियों से तैयार मलहम व लेप काफी कारगर हो सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में फोड़े फुंसी व घाव : 4 चम्मच नीम के पत्तों का रस, 1 चम्मच गाय का घी, 250 मिलिग्राम रसकपूर, 2 ग्राम मोम लें। मोम को थोड़ा गर्म करके पिघलाएं व आंच से उतारने के बाद उसमें बाकी सामग्री को अच्छे से मिलाकर मलहम तैयार करें। ठंडे होने पर प्रयोग करें। सिर के फोड़े : कपूरकाचरी को जलाकर उसकी 1 चम्मच राख लें। इसमें 2 चम्मच तिल का तेल, चौथाई-चौथाई चम्मच नीम, मेहंदी व पटोल के पत्तों का रस व 10 ग्राम मोम मिलाकर तैयार मलहम को सिर की खुजली व फोड़ों पर प्रयोग करें। कुष्ठ रोग : करंज, नीम व खैर की छालयुक्त लकड़ी समान मात्रा में लेकर जलाएं। इसको पीसकर गोमूत्र में मिलाकर उबालें। गाढ़ा होने पर आंच से उतारकर ठंडा कर लें, फिर इसमें इ
तमाम रोगों के लिए फायदेमंद है छोटी सी लौंग, जानें इसके फायदे

तमाम रोगों के लिए फायदेमंद है छोटी सी लौंग, जानें इसके फायदे

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वैसे तो लौंग का इस्तेमाल मसाले आदि में किया जाता है। लेकिन लौंग एक बेहतरीन औषधि भी है। यह चरपरी, कड़वी और तासीर में ठंडी होती है। लौंग नेत्र रोगों, दांतों की समस्या, खांसी, अजीर्ण, गैस, भोजन में अरुचि, उल्टी और अधिक प्यास लगने की तकलीफ में उपयोगी है। लौंग को मिश्री के साथ पीसकर चाटने से गर्भावस्था में उल्टियां, जी घबराना और भोजन में अरुचि दूर होती है। खाने के बाद दो लौंग मुंह में रखकर चूसते रहने से पेट का तनाव कम होता है, आंतों में भोजन की पाचन गति बढ़ती है और अफरा, डकारें व गैस की समस्या दूर होती है। इसका तेल गठिया, सिरदर्द में लाभदायक होता है। कैविटी होने पर रुई की फुरेरी बनाकर रखने से दांतदर्द में आराम मिलता है।लौंग खाने से दांतों की बदबू, सांस की दुर्गंध और पायरिया रोग में राहत मिलती है। खांसी, जुकाम, सिरदर्द में लौंग, तुलसी के पत्ते और अदरक वाली चाय फायदा करती है। लौंग को मुंह में रखक
पेट के रोगों में लाभकारी है पुदीना, आैर भी हैं कर्इ फायदे

पेट के रोगों में लाभकारी है पुदीना, आैर भी हैं कर्इ फायदे

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पुदीने में मौजूद फाइबर कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है और मैगनीशियम हड्डियों को ताकत देता है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ कई तरह से फायदेमंद होता है।अाइए जानते हैं पुदीने के फायदाें के बारे में :- - पुदीने की पत्तियों का ताजा रस नींबू और शहद के साथ समान मात्रा में लेने से पेट की सभी बीमारियों में आराम मिलता है। - पुदीने का रस काली मिर्च व काले नमक के साथ चाय की तरह उबालकर पीने से जुकाम, खांसी व बुखार में राहत मिलती है। - पुदीने की पत्तियां चबाने या उनका रस निचोड़कर पीने से हिचकियां बंद हो जाती हैं। - सिरदर्द में पत्तियों का लेप माथे पर लगाने से आराम मिलता है। - माहवारी समय पर न आने पर पुदीने की सूखी पत्तियों के चूर्ण को शहद के साथ समान मात्रा में मिलाकर दिन में दो-तीन बार नियमित रूप से लें। - पेट संबंधी किसी भी प्रकार का विकार होने पर एक चम्मच पुदीने के रस को एक कप पानी में मिलाकर पिएं। -
औषधीय स्नान से मिलेगी रोगों से मुक्ति, बनी रहेगी चुस्ती

औषधीय स्नान से मिलेगी रोगों से मुक्ति, बनी रहेगी चुस्ती

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हर रोज स्नान सामान्य परंपरा या रिवाज नहीं है। असल में यह एक स्किन केयर थैरेपी है जो मस्तिष्क को तरोताजा करके नई ऊर्जा प्रदान करती है। आइए जानते हैं स्नान के जरिए रोगों को दूर करने के बारे में:- लैवेंडर ऑयल: एक बाल्टी गुनगुने पानी में 5-10 मिलिलीटर लैवेंडर ऑयल मिलाकर नहाने से त्वचा का रुखापन दूर होकर चमक बढ़ती है। शहद : 10 लीटर पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर स्नान करने से त्वचा मुलायम होती है। सफेदा : मुठ्ठीभर सफेदे के पत्तों को सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। इसे एक लीटर पानी में उबालें। इस सत्व को नहाने के पानी में मिलाकर प्रयोग करने से अनिद्रा की समस्या दूर होती है। एप्सम सॉल्ट : एक बाल्टी गुनगुने पानी में 50 ग्राम एप्सम सॉल्ट मिलाकर नहाने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। कच्चा दूध : पानी में कच्चा दूध मिलाकर नहाने से त्वचा कोमल होती है और रंगत में निखार आता है। नींबू : पसीने से द
सर्दी में सुबह के समय होने वाले रोगों से बचें

सर्दी में सुबह के समय होने वाले रोगों से बचें

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गले में सूजन व दर्द - सर्दियों में अक्सर सुबह उठने पर गले में हल्का दर्द और सूजन की शिकायत होती है। इसका कारण कमरे में ड्राई एयर होना है। कभी-कभी नाक बंद होने की वजह से हम मुंह से सांस लेने लगते हैं, जिससे गला सूख जाता है। कोशिश करें कि कमरे को ज्यादा गर्म न रखें ताकि उसमें उचित नमी रहे। इसके अलावा भाप लेने से भी समस्या दूर हो सकती है। रात को सोते समय बिस्तर के पास ही पानी रखें और गला सूखने पर पिएं। जोड़ों के दर्द की समस्या - गठिया का दर्द अक्सर देर रात या तड़के में ज्यादा होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस समय जॉइंट ठंडे हो जाते हैं। इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं क्योंकि कम पानी पीने की वजह से खून में यूरिक एसिड बढ़ जाता है और दर्द होने लगता है। जब हो जाए सिरदर्द - माइग्रेन व सिरदर्द अक्सर सुबह ही शुरू होता है। नींद से अचानक जगने की वजह से सुबह 4 बजे से लेकर 8 बजे के बीच यह दर्द
त्वचा संबंधी रोगों में फायदेमंद है शाहतरा, जानें इसके बारे में

त्वचा संबंधी रोगों में फायदेमंद है शाहतरा, जानें इसके बारे में

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शाहतरा सर्दी में उगने वाला बेहद मुलायम व हरे नीले रंग का पौधा होता है। इस पौधे की पत्तियां धनिए जैसी होती हैं। यूनानी चिकित्सा में इस पौधे को अर्क(जूस) व शरबत बनाकर प्रयोग किया जाता है। खून साफ करने, खुजली, फोड़े-फुंसी, एक्जिमा और सोराइसिस जैसे त्वचा रोगों में यह प्रभावी है। पीलिया और पुराना बुखार : इसके 5-6 ग्राम बीजों को पीसकर पाउडर बना लें। इस चूर्ण को सुबह व शाम पानी के साथ लेने से आराम मिलता है।परहेज : शाहतरा लेने के दौरान गर्म, तली-भुनी व बादी करने वाली चीजों को खाने से परहेज करना चाहिए। अर्क भी उपयोगी - अर्क निकालने के लिए फार्मेसी में शाहतरा के फूल, जड़ी-बूटियां जैसे मुंडी, मेहंदी पत्ता, चरायता, उषबा, मको, काफनीर, गाओजबा व उन्नाव को 16 लीटर पानी में भिगोकर पानी आधा होने तक उबालते हैं। इसे रोगी की स्थिति के हिसाब से दिया जाता है।(अर्क निर्माण व सेवन डॉक्टरी सलाह से ही करें) Patrika
Gharelu nuskhe – कई रोगों को दूर करता है अशोक का पेड़

Gharelu nuskhe – कई रोगों को दूर करता है अशोक का पेड़

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अशोक का पेड़ औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इसे इस्तेमाल कर हम कई बीमारियों से निजात और राहत पा सकते हैं। अशोक का रस कसेला, कड़वा और ठंडी प्रकृति का होता है। यह रंग निखारने वाला, ऊष्मा नाशक और सूजन दूर करने वाला होता है। यह रक्त विकार, पेट के रोग, बुखार और जोड़ों के दर्द को दूर करता है। अशोक के बीज पानी में पीसकर लगभग दो चम्मच नियमित रूप से लेने पर मूत्र न आने की शिकायत दूर होती है। इससे पथरी में भी आराम मिलता है। अशोक की छाल के काढ़े में बराबर मात्रा में सरसों का तेल मिलाकर फोड़े-फुंसियों पर लगाने से लाभ मिलता है। अशोक की छाल के चूर्ण में मिश्री समान मात्रा में मिलाकर,गाय के दूध के साथ एक-एक चम्म्मच दिन में तीन बार कुछ हफ्तों तक लेने से वाइट डिस्चार्ज में लाभ होता है। अशोक की छाल और ब्राह्मी का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच सुबह-शाम एक कप दूध के साथ नियमित रूप से कुछ माह तक लेने