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Tag: शिशु

जिंदगीभर के लिए शिशु को अपाहिज बना सकता है स्पाइना बिफिडा

जिंदगीभर के लिए शिशु को अपाहिज बना सकता है स्पाइना बिफिडा

Health
प्रेग्नेंसी के बाद हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा स्वस्थ पैदा हो, लेकिन गर्भावस्था के दौरान बरती गई लापरवाही शिशु को जिंदगीभर के लिए अपाहिज भी बना सकती है। नवजात शिशुओं में जन्मजात होने वाली स्पाइना बिफिडा एक गंभीर बीमारी है, जो बच्चे को हमेशा के लिए चलने-फिरने से लाचार कर सकती है। सीनियर न्यूरो सर्जन डॉ केके बंसल बताते हैं कि, स्पाइना बिफिडा दिमाग और रीढ़ की हड्डी में होने वाली जन्मजात विकृति होती है, जिसे जन्म से पहले ही पता किया जा सकता है। पैदा होने के बाद अगर बच्चे की पीठ में गांठ होती है, जिसमें पानी या अन्य टिश्यू भरे होते हैं वही स्पाइनल बिफिडा होता है। तीन तरह का स्पाइना बिफिडास्पइाना बिफिडा तीन तरह का होता है, स्पाइना बिफिडा ओक्युल्टा, मेनिंगोसील और माइलोमेनिंगोसील। स्पाइना बिफिडा ओक्युल्टा में रीढ़ की हड्डियों में नुकसान पहुंचे बिना उसमें छेद हो जाता है, वहीं मोनिंगो
Unique initiative: भारत में होगी नवजात शिशु की डिजिटल ट्रैकिंग, जानें क्या है ये एडवांस्ड टेक्नोलॉजी

Unique initiative: भारत में होगी नवजात शिशु की डिजिटल ट्रैकिंग, जानें क्या है ये एडवांस्ड टेक्नोलॉजी

Health
नई दिल्ली। महिलाओं एवं बच्चों के लिए प्रमुख अस्पताल अपोलो क्रेडल ने बुधवार को 'एडवांस्ड टेक्नोलॉजी नियोनेटल इन्टेन्सिव केयर युनिट (ईएनआईसीयू)' को लॉन्च किया। ऐसा संभवत: भारत में पहली बार है कि नवजात की डिजिटल ट्रैकिंग के लिए इस तरह की अनूठी पहल की गई है। ईएनआईसीयू के माध्यम से अपोलो क्रेडल के विशेषज्ञ अस्पताल में या किसी भी स्थान पर बैठकर हर छोटी जानकारी पर नजर रख सकेंगे, जैसे दवाएं, पोषण, शिशु का फीडिंग पैटर्न तथा कैलोरी और ग्रोथ चार्ट आदि। इस एनआईसीयू की मदद से अपोलो क्रेडल के डॉक्टर छोटे नगरों के एनआईसीयू को भी सहयोग प्रदान कर सकेंगे। प्री-टर्म बेबी की रियल टाइम मॉनिटरिंग एवं डिजिटल रिकॉर्ड से नैदानिक परिणामों में सुधार आएगा और भारत में नवजात शिशुओं को विश्वस्तरीय इलाज मिल सकेगा। ईएनआईसीयू के उद्घाटन समारोह के दौरान अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अनुपम सिब्बल ने कह
विशेषज्ञों का दावा स्तनपान से दिमाग मजबूत होता है शिशु का

विशेषज्ञों का दावा स्तनपान से दिमाग मजबूत होता है शिशु का

Health
मां का दूध यूं तो सभी बच्चों के लिए अच्छा है, लेकिन समय से पूर्व बच्चों के लिए तो यह किसी वरदान से कम नहीं है। एक शोध में पाया गया है कि समय से पहले पैदा हुए जिन बच्चों को मां का दूध पिलाया गया, उनका... Live Hindustan Rss feed
शिशु की मांओं के लिए जरूरी है पर्याप्त नींद

शिशु की मांओं के लिए जरूरी है पर्याप्त नींद

Health
नींद मां के लिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि अपर्याप्त नींद व आराम मां के दूध की आपूर्ति को प्रभावित करता है । - मां रात में दूध पिलाने के बाद अच्छी तरह कैसे सोए? पहले के जमाने में मांएं अपने नवजात शिशुओं के साथ ही सोया करती थीं। आज यह एक मुद्दा बन चुका है। यदि बिस्तर साझा किया जा रहा है तो कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ताकि मां और शिशु को अच्छी नींद आ जाए और मां शिशु की समय-समय पर देखभाल भी कर सके।डायपर ड्यूटी, लोरी सुनाने आदि में मदद लें- यदि शिशु की देखभाल की जिम्मेदारी मां पर है, तो पार्टनर रात के समय शिशु की आवश्यकताओं को पूरा करने की जिम्मेदारी उठा सकते हैं। अधिक नींद पाने की युक्तियां और यह मां और शिशु के सेहत को कैसे प्रभावित करता है।जब भी मौका मिले, सो जाओ: ज्यादातर शिशु दिन में सोते हैं और रात को जागते हैं। ऐसे में बेहतर होगा कि जब दिन में शिशु सोएं, तब ही नींद ले ली जाए। मौका न छ
प्रेगनेंसी में ज्यादा ग्लूटेन युक्त आहार लेने से शिशु में डायबिटीज का खतरा

प्रेगनेंसी में ज्यादा ग्लूटेन युक्त आहार लेने से शिशु में डायबिटीज का खतरा

Health
गर्भावस्था के दौरान ज्यादा ग्लूटेन युक्त आहार लेने से शिशु में टाइप-1 मधुमेह होने का खतरा बढ़ जाता है। ग्लूटेन एक प्रकार का प्रोटीन है, जो गेहूं, राई और ज्वार में पाया जाता है। एक नए अध्ययन से इस बात... Live Hindustan Rss feed

UN की रिपोर्ट में दावा, भारत में हर 2 मिनट में होती है 3 नवजात शिशु की मौत

India
इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान भारत में सबसे कम साल 2017 में लगभग 8,02,000 नवजात शिशुओं को अपनी जान गंवानी पड़ी Jagran Hindi News - news:national
क्या है सडन डेथ और इससे अपने नवजात शिशु को कैसे बचाएं? यहां जानें

क्या है सडन डेथ और इससे अपने नवजात शिशु को कैसे बचाएं? यहां जानें

Health
जन्म के बाद के 2 साल तक किसी भी बच्चे की जिंदगी के सबसे अहम साल होते हैं। दो साल की उम्र तक अधिकतर बच्चे चलना और बोलना सीख जाते हैं। बच्चों को स्वस्थ रखकर माता-पिता उनका बेहतर पालन-पोषण कर सकते हैं। ऐसे समय में बच्चों की सबसे ज्यादा देखरेख जरूरत होती है। सोने से लेकर खाने-पीने व खिलौने आदि को लेकर बेहद सतर्कता बरतने की जररूत होती है। जरा-सी लापरवाही बच्चे की सडन डेथ की वजह बन सकती है। What is the main cause of SIDS? क्या है सडन डेथ? एक साल तक के बच्चों की अचानक मौत के लिए सडन इंफेंट डेथ सिंड्रोम शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। कभी-कभी सोते-सोते ही बच्चे की मौत हो जाती है, जिसे कॉट डेथ कहा जाता है। एक माह से एक साल के कई बच्चों की मौत सडन इंफेंट डेथ सिंड्रोम से होती है। इनमें ज्यादातर बच्चे 2-4 महीने के होते हैं। Why does SIDS happen? क्या करें?इससे बचने के लिए गर्भावस्था के दौरान मां को प
शिशु को 4 माह से पहले ठोस आहार देने पर हो सकती मोटापे की दिक्कत

शिशु को 4 माह से पहले ठोस आहार देने पर हो सकती मोटापे की दिक्कत

Health
जन्म के शुरुआती माह में दिया जाने वाला ठोस आहार शिशु के मस्तिष्क और शरीर के विकास के लिए जरूरी है। आहार सही तरीके और समय पर देने से बच्चे को एलर्जी से भी दूर रख सकते हैं। प्रश्न : बच्चे का खानपान कब शुरू करना चाहिए?ज्यादातर बच्चे को 4 से 6 माह के बीच ठोस आहार दिया जाता है। शोध से पता चलता है कि बच्चे को 4 माह से पहले ठोस आहार शुरू करने से बच्चों में मोटापे का खतरा बढ़ सकता है। इस दौरान शिशु द्वारा सिर संभालना, आहार मुंह में अंदर ले जाने की क्षमता, स्तन या बोतल को खींचना और अन्य चीजों को करने या खाने के लिए चारों ओर देखने की क्षमताएं शामिल हैं। यदि बच्चा ठोस आहार खिलाने पर जीभ से बाहर निकाल देता है तो उसको ठोस पदार्थ देने के लिए एक सप्ताह बाद दोबारा प्रयास करें। प्रश्न : कौनसी चीजें खिलाकर शुरुआत करनी चाहिए?ठोस आहार के लिए वैसे कोई सख्त दिशा-निर्देश नहीं हैं। पहले 6 माह से अधिक उम्र के बच्च
Breastfeeding Week : मां का दूध बढ़ाता है शिशु में प्रतिरक्षा क्षमता

Breastfeeding Week : मां का दूध बढ़ाता है शिशु में प्रतिरक्षा क्षमता

Health
पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को अपने शिशु को स्तनपान कराने में अपूर्व सुखद अनुभूति होती है और यह शिशु के लिए भी एक अनमोल उपहार है। मां का दूध शिशु में प्रतिरक्षा क्षमता, यानी रोगों से लडऩे की ताकत बढ़ाता है। महिलाओं को शिशु को स्तनपान कराने के सही तरीके और यह अच्छी तरह पता होना चाहिए कि बच्चे को कैसे, कब और कितना स्तनपान कराना है। मिथकों के अलावा आधुनिक जीवनशैली की वास्तविकताएं नई माताओं में अक्सर उलझन पैदा करती रहती है, इसलिए उन्हें स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों को नजरअंदाज करना चाहिए। स्तनपान एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। घर की बुजुर्ग महिलाओं को चाहिए कि वे नई माताओं को स्तनपान के लिए प्रेरित करें और उन्हें स्तनपान के सही तरीके बताएं। स्तनपान कराने के लिए माताओं को कुछ महत्वपूर्ण चीजों को ध्यान का रखना चाहिए, जैसे कि शिशु के जीवन के पहले घंटे के भीतर स्तनपान कराने की शुरुआत हो और छह महीने