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Tag: संक्रमण

एलर्जी या संक्रमण से होते हैं त्वचा संबंधी रोगa

एलर्जी या संक्रमण से होते हैं त्वचा संबंधी रोगa

Health
सोरायसिस की समस्या त्वचा की सबसे ऊपरी परत एपिडर्मिस पर होती है। सामान्य रूप से यह तकलीफ हमारी त्वचा पर लाल रंग की सतह के रूप में उभरती है जिसमें स्कैल्प (सिर की सतह), हथेलियां, तलवे, कोहनी, घुटने और पीठ आदि अंग ज्यादा प्रभावित होते हैं। इस रोग के कारणों का फिलहाल कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है लेकिन कई शोधों में यह माना गया है कि आनुवांशिकता, एलर्जी या किसी प्रकार के संक्रमण से यह परेशानी हो सकती है। इसके अलावा मौसम में होने वाले बदलाव भी इसका कारण बनते हैं। लक्षण : इस रोग से प्रभावित हिस्से की चमक कम होने से त्वचा रूखी, फटी और मोटी दिखाई देती है व उसमें खुजली भी होती है। सोरायसिस के क्रॉनिक व गंभीर होने पर करीब 40 प्रतिशत रोगियों में जोड़ों में दर्द व सूजन जैसे लक्षण भी पाए जाते हैं। इस अवस्था को सोराइटिस आर्थराइटिस कहते हैं। यह बीमारी सर्दियों में ज्यादा परेशान करती है। होम्योपैथिक उपचार-सोरा
2 साल की पोती की जान से दादा ने किया खातरनाक खिलवाड़, बच्ची को दर्द हुआ तो उसके पेट पर रख दिया गर्म तार, फिर मासूम की बॉडी में ऐसा संक्रमण फैला कि अब उसे डॉक्टर भी नहीं बचा सके

2 साल की पोती की जान से दादा ने किया खातरनाक खिलवाड़, बच्ची को दर्द हुआ तो उसके पेट पर रख दिया गर्म तार, फिर मासूम की बॉडी में ऐसा संक्रमण फैला कि अब उसे डॉक्टर भी नहीं बचा सके

Rajasthan
भीलवाड़ा (राजस्थान)।अंधविश्वास में लाेग मासूमाें की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। 11 दिन पहले डांव लगाने से तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराई गई दो साल की लक्ष्मी ने दम तोड़ दिया है। अब तक गंगरार पुलिस यह जानने में नाकाम रही है कि डांव किसने लगाया? माैत की जानकारी बाल कल्याण समिति काे देना भी जरूरी नहीं समझा।गंगरार के मोती बुकंण खेड़ा की लक्ष्मी काे पेट दर्द व सांस की तकलीफ थी। उसके दादा कालू ऊंट चराने वाले से बालिका के पेट पर गर्म तार से डांव लगा दिया। तबीयत में सुधार नहीं होने पर 12 अप्रैल को उदयपुर रैफर किया। परिजन उसे लेकर रवाना हुए और रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।सवाल; 11 दिन बाद भी परिजनों से हुलिया पूछकर आरोपी नहीं ढूंढ़ाजांच अधिकारी गंगरार थाने के हैड कांस्टेबल शैतान सिंह का कहना है कि परिजनाें ने मौत की जानकारी पुलिस को नहीं दी इसलिए पोस्टमार्टम नहीं हो सका
दवा का कोर्स अधूरा छोडऩे पर हो सकता है संक्रमण

दवा का कोर्स अधूरा छोडऩे पर हो सकता है संक्रमण

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हर समस्या में इन दवाओं को लेना ठीक नहींइंन्फेक्शन वाली बीमारियों में एंटीबायोटिक कारगर हैं। कई परिस्थितियों में यह जीवनदायक होती हैं लेकिन हर समस्या में इन दवाओं को लेना ठीक नहीं माना जाता है। इन्फेक्शन में कारगर बीमारी के लक्षणों के अनुसार विशेषज्ञ जांच कर पता लगाते हैं कि यह बैक्टीरियल इंफेक्शन है या वायरल। बैक्टीरियल इंफेक्शन रक्त, यूरिन, फेफड़ों व घाव आदि के इलाज में एंटीबायोटिक दवाएं कारगर मानी जाती हंै।एलर्जी: एंटीबायोटिक से एलर्जी होने पर त्वचा व सांस, गले, फेफड़े में सूजन की समस्या हो सकती है।प्रतिरोध क्षमता बार-बार एंटीबायोटिक दवाएं लेने से बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। ऐसे में इन दवाओं का असर धीमा या नहीं होता है। एंटीबायोटिक लेने पर संवेदनशील जीवाणु तो खत्म हो जाते हैं लेकिन प्रतिरोधी जीवाणओं पर असर नहीं होता है। वे अपनी ताकत व संख्या बढ़ाते रहते हैं। फिर होता यह है क
हर्पीज, बैक्टीरिया और डैंड्रफ के संक्रमण का आंखों पर होता है असर

हर्पीज, बैक्टीरिया और डैंड्रफ के संक्रमण का आंखों पर होता है असर

Health
ये होते हैं लक्षणकिसी रोग, जख्म, संक्रमण या कुपोषण से नजर धुंधली हो सकती है। आंखों से पानी निकलना, मवाद, धुंधला दिखना, आंखों का सूख जाना, लाल होना, पलकों पर सूजन, खुजली, दर्द व जलन आदि नेत्र संक्रमण के लक्षण हैं। जब हम कमजोर नजर की शिकायत लेकर आंखों के डॉक्टर के पास जाते हैं तो वे जांच करने के बाद कुछ खास परिस्थितियों में कॉर्निया ट्रांसप्लांट करवाने की सलाह देते हैं। कॉर्निया ट्रांसप्लांट की सलाह हर्पीज, फंगल या बैक्टीरियल केराटिटिस जैसे संक्रमण होने के कारण दी जाती है। कुपोषण, रासायनिक दुष्प्रभाव, सूजन से कॉर्निया को नुकसान पहुंचता है। कॉर्निया आंसुओं और आंखों के पानी से ही पोषित होता रहता है। हर्पीजबचपन में यदि छोटी माता (चिकन पॉक्स) हो गई है तो हर्पीज हो सकता है। जब शरीर की इम्युनिटी कमजोर होने लगती है तो बैक्टीरिया वापस सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में हर्पीज हो सकता है जो कॉर्निया को नुकस
टॉन्सिल में संक्रमण चिंता की बात

टॉन्सिल में संक्रमण चिंता की बात

Health
उपचार में एंटीबायोटिक व दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैंटॉन्सिल में बार-बार संक्रमण चिंता की बात है। शरीर के बॉडीगार्ड टॉन्सिल शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाएं रखने में अहम रोल निभाते हैं। गले में दोनों तरफ तालू के नीचे पिण्डनुमा संरचना में टॉन्सिल स्थित होते हैं जो एक प्रकार के लिम्फाइड ऊतक है। टॉन्सिल में संक्रमण को टॉन्सिलाइटिस कहते हैं। इसके उपचार में एंटीबायोटिक व दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं। ये यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन बच्चों में ज्यादा होती है। इसके लक्षणों में सूजन, गले में दर्द, बुखार व निगलने में तकलीफ होती है। टॉन्सिल को लेकर कई तरह के भ्रम हैं। कई बार गलत जानकारी एवं सलाह के कारण अनावश्यक रूप से टॉन्सिल को निकाल दिया जाता है। किन कारणों से टॉन्सिल निकाल देते हैं? यदि एक साल में चार से छह बार से ज्यादा संक्रमण हो। टॉन्सिल का एक ओर का आकार बढ़ जाएं। इनका आ
एचआईवी संक्रमण में लाभ देता है विटामिन-डी

एचआईवी संक्रमण में लाभ देता है विटामिन-डी

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विटामिन-डी की हाई डोज (अधिक मात्रा) शरीर को एचआईवी संक्रमण से लड़ने में मदद करने के साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ा सकती है। पेन स्टेट यूनिवर्सिटी में हुए शोध के अनुसार विटामिन-डी, एचआईवी-1 के खतरे को घटाने और रोग को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सामान्य व सस्ता उपाय है। शाेध के अनुसार सूर्य की किरणों को प्राप्त कर हमारा शरीर विटामिन-डी का निर्माण करता है या फिर इस पोषक तत्त्व को हम खाद्य पदार्थों से प्राप्त करते हैं। इसकी हाई डोज हमें रक्त संबंधी कई प्रकार के संक्रमणों से लड़ने में मदद करती हैं। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि सर्दी के दिनों में धूप का स्तर कम होने से शरीर को विटामिन-डी कम मिल पाता है जिससे इस मौसम में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में विशेषज्ञ मरीजों को संक्रमण से बचाव के लिए विटामिन-डी के सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं। Patrika : India's Leading Hindi News Po
पौरुष ग्रन्थि में संक्रमण से बुखार के साथ रुक सकता है यूरिन

पौरुष ग्रन्थि में संक्रमण से बुखार के साथ रुक सकता है यूरिन

Health
50 वर्ष की आयु के बाद बढ़ता प्रोस्टेट का आकार जैसे-जैसे पुरुषों की आयु बढ़ती है, उनके शरीर में कई तरह के परिवर्तन होते हैं। इन परिवर्तनों में से अधिकांश की पौरुष ग्रंन्थि (प्रोस्टेट) बढ़ जाती है। सामान्यत: 50 वर्ष की आयु के बाद प्रोस्टेट का आकार बढ़ता है। प्रोस्टेटाइटिस, बीपीएच (बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया), कैंसरप्रोस्टेट में विकसित होने वाले रोग हैं। बीपीएच को पौरुष ग्रंथि विस्तार भी कहा जाता है। बुजुर्गों में बीपीएच सबसे ज्यादा होता है। यह प्रोस्टेट की परेशानी की लंबे समय तक अनदेखी और इलाज में लापवाही से किडनी में स्टोन व किडनी तक खराब हो सकती है। तकलीफ होने पर चिकित्सक की परामर्श से जांचों से इसकी पहचान होती है। पौरुष ग्रंथि में यदि संक्रमण हो तो बुखार आ सकता है। ऐसे में यूरिन नहीं आ रहा है या तेज दर्द के साथ यूरिन बूंद-बूंद आ रहा है तो इससे ब्लैडर में यूरिन भर जाता है। पीडि़त को
आईसीयू के संक्रमण से एेसे करें अपना बचाव

आईसीयू के संक्रमण से एेसे करें अपना बचाव

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आमतौर पर लोग किसी रिश्तेदार या मित्र के आईसीयू (इंटेन्सिव केयर यूनिट) में होने की खबर सुनकर खुद को रोक नहीं पाते और उसे देखने के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं। लेकिन ऐसा करना न सिर्फ मरीज के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है बल्कि वहां मौजूद अन्य लोगों के लिए भी खतरनाक हो सकता है। आईसीयू में संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।आइए जानते हैं इसके बारे में - मरीज के लिए परेशानीयह एक एेसी इकाई है जहांं गंभीर मरीजों को रखा जाता है। एेसे लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। कई बार बाहर से आए लोगों के हाथ संक्रमित होने, साफ-सफाई की कमी या परिजन के किसी रोग से ग्रसित होने के कारण बैक्टीरिया मरीज तक पहुंच जाते हैं। इससे उनके लिए परेशानी बढ़ सकती है। इन बातों का रहे खयाल- ऐसे रोगियों के संपर्क में कम से कम रहें।- आईसीयू में जाते समय हाथ स्वच्छ रखें व मास्क का प्रयोग करें।- छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुज
कान काे संक्रमण का शिकार बना सकती है नमी

कान काे संक्रमण का शिकार बना सकती है नमी

Health
वातावरण में मौजूद नमी कान में फंगल इंफेक्शन (ऑटोमाइकोसिस) का कारण बनती है। इस रोग में कान की नलिका के बाहरी भाग में संक्रमण होता है। संक्रमण की वजह एस्पर्गिलस व कैंडिडा नामक जीवाणु होते हैं जो नमी में तेजी से फैलते हैं। लक्षण :इसमें कान में भारीपन, दर्द व खुजली के साथ रिसाव होने लगता है। कई बार व्यक्तिको कान बंद होने का अहसास भी होता है। स्थिति गंभीर होने पर कान के पर्दे में छेद भी हो सकता है। इलाज : इस रोग में विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी होता है क्योंकि वे कान की सफाई कर फंगल को बाहर निकालते हैं और जरूरत पड़ने पर एंटीफंगल ईयर ड्रॉप व मलहम का प्रयोग भी करते हैं। ध्यान रखें :खुजली या कोई तकलीफ होने पर तीली या ईयरबड का प्रयोग न करें। तेल या लहसुन का रस न डालें इससे संक्रमण बढ़ सकता है। जिन्हें कान बहने की समस्या हो वे नहाते समय ध्यान रखें कि कान में पानी न जाए। Patrika : India's Leading H
महिलाओं को अधिक रक्तस्राव, संक्रमण से खराब होती है किडनी

महिलाओं को अधिक रक्तस्राव, संक्रमण से खराब होती है किडनी

Health
महिलाओं में अधिक रक्तस्राव से ब्लड प्रेशर कम हो जाता है। इससे किडनी में रक्त प्रवाह धीमा होता है। यह शरीर में प्रवाहित 20 से 25 फीसदी रक्त को शुद्ध करने का काम करती है। यह प्रक्रिया बंद होने पर किडनी डेड हो जाती है। गर्भपात का खतरा ज्यादा गर्भावस्था के दौरान क्रॉनिक किडनी डिजीज होने पर गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। गर्भावस्था के दौरान बीमारी से गर्भस्थ शिशु का सही तरीके से विकास नहीं हो पाता है। बच्चे को स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं हो सकती हैं। शादी से पहले यह बीमारी होने पर महिलाओं में नि:संतानता की आशंका रहती है।एंटीबॉडीज भी बड़ी वजह ल्यूपस नेफ्रोपैथी किडनी रोग से जुड़ी बीमारी है। महिला के शरीर में एंटीबॉडीज बनने लगती है जो किडनी की स्वस्थ कोशिकाओं को खत्म करने का काम करने लगता है जिसका सीधा असर किडनी की कार्यक्षमता पर पड़ता है। नेफ्रॉन्स खराब होने लगते हैं। इसका समय रहते इलाज कराया जाए