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Tag: संक्रमण

आईसीयू के संक्रमण से एेसे करें अपना बचाव

आईसीयू के संक्रमण से एेसे करें अपना बचाव

Health
आमतौर पर लोग किसी रिश्तेदार या मित्र के आईसीयू (इंटेन्सिव केयर यूनिट) में होने की खबर सुनकर खुद को रोक नहीं पाते और उसे देखने के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं। लेकिन ऐसा करना न सिर्फ मरीज के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है बल्कि वहां मौजूद अन्य लोगों के लिए भी खतरनाक हो सकता है। आईसीयू में संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।आइए जानते हैं इसके बारे में - मरीज के लिए परेशानीयह एक एेसी इकाई है जहांं गंभीर मरीजों को रखा जाता है। एेसे लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। कई बार बाहर से आए लोगों के हाथ संक्रमित होने, साफ-सफाई की कमी या परिजन के किसी रोग से ग्रसित होने के कारण बैक्टीरिया मरीज तक पहुंच जाते हैं। इससे उनके लिए परेशानी बढ़ सकती है। इन बातों का रहे खयाल- ऐसे रोगियों के संपर्क में कम से कम रहें।- आईसीयू में जाते समय हाथ स्वच्छ रखें व मास्क का प्रयोग करें।- छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुज
कान काे संक्रमण का शिकार बना सकती है नमी

कान काे संक्रमण का शिकार बना सकती है नमी

Health
वातावरण में मौजूद नमी कान में फंगल इंफेक्शन (ऑटोमाइकोसिस) का कारण बनती है। इस रोग में कान की नलिका के बाहरी भाग में संक्रमण होता है। संक्रमण की वजह एस्पर्गिलस व कैंडिडा नामक जीवाणु होते हैं जो नमी में तेजी से फैलते हैं। लक्षण :इसमें कान में भारीपन, दर्द व खुजली के साथ रिसाव होने लगता है। कई बार व्यक्तिको कान बंद होने का अहसास भी होता है। स्थिति गंभीर होने पर कान के पर्दे में छेद भी हो सकता है। इलाज : इस रोग में विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी होता है क्योंकि वे कान की सफाई कर फंगल को बाहर निकालते हैं और जरूरत पड़ने पर एंटीफंगल ईयर ड्रॉप व मलहम का प्रयोग भी करते हैं। ध्यान रखें :खुजली या कोई तकलीफ होने पर तीली या ईयरबड का प्रयोग न करें। तेल या लहसुन का रस न डालें इससे संक्रमण बढ़ सकता है। जिन्हें कान बहने की समस्या हो वे नहाते समय ध्यान रखें कि कान में पानी न जाए। Patrika : India's Leading H
महिलाओं को अधिक रक्तस्राव, संक्रमण से खराब होती है किडनी

महिलाओं को अधिक रक्तस्राव, संक्रमण से खराब होती है किडनी

Health
महिलाओं में अधिक रक्तस्राव से ब्लड प्रेशर कम हो जाता है। इससे किडनी में रक्त प्रवाह धीमा होता है। यह शरीर में प्रवाहित 20 से 25 फीसदी रक्त को शुद्ध करने का काम करती है। यह प्रक्रिया बंद होने पर किडनी डेड हो जाती है। गर्भपात का खतरा ज्यादा गर्भावस्था के दौरान क्रॉनिक किडनी डिजीज होने पर गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। गर्भावस्था के दौरान बीमारी से गर्भस्थ शिशु का सही तरीके से विकास नहीं हो पाता है। बच्चे को स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं हो सकती हैं। शादी से पहले यह बीमारी होने पर महिलाओं में नि:संतानता की आशंका रहती है।एंटीबॉडीज भी बड़ी वजह ल्यूपस नेफ्रोपैथी किडनी रोग से जुड़ी बीमारी है। महिला के शरीर में एंटीबॉडीज बनने लगती है जो किडनी की स्वस्थ कोशिकाओं को खत्म करने का काम करने लगता है जिसका सीधा असर किडनी की कार्यक्षमता पर पड़ता है। नेफ्रॉन्स खराब होने लगते हैं। इसका समय रहते इलाज कराया जाए
कच्चे दूध से बढ़ता संक्रमण, इन चीजों से मिलेगा कैल्शियम

कच्चे दूध से बढ़ता संक्रमण, इन चीजों से मिलेगा कैल्शियम

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गाय या भैंस का कच्चा दूध पीना भले ही आपको पसंद हो लेकिन सेहत के लिए कच्चा दूध पीना सही नहीं है। अमरीका के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में इस बात की पुष्टि की है। उनके अनुसार कच्चे दूध में कई सारे बैक्टीरिया के साथ-साथ मलाई की एक मोटी परत होती है और दूध का रंग पीला होता है। जब आप यह दूध पीते हैं तो कई तरह के बैक्टीरिया और वसा शरीर में जाने से बुखार, अस्थमा और एक्जिमा जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में कच्चे दूध को 72 डिग्री सेल्सियस तापमान पर कम से कम 25 सेकंड के लिए उबाला जाना चाहिए । ये चीजें देंगी भरपूर कैल्शियम - हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम का नियमित सेवन जरूरी है। लेकिन अक्सर लोग सोचते हैं कि यह दूध, दही व पनीर जैसे डेयरी उत्पादों में ही कैल्शियम मिलता है। कई लोगों को डेयरी उत्पाद पसंद नहीं होते या फिर उन्हें इनके प्रयोग से दिक्कत होती है। ऐसे में कैल्शियम के और भी कई बेहतर स्र
पेट के संक्रमण, अनिद्रा और कोलेस्ट्रोल के लिए फायदेमंद है तेजपत्ता

पेट के संक्रमण, अनिद्रा और कोलेस्ट्रोल के लिए फायदेमंद है तेजपत्ता

Health
तेजपत्ता भारतीय मसालों का अहम हिस्सा है। यह भोजन में न सिर्फ स्वाद बढ़ाता है बल्कि सेहत भी संवारता है। आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में। तेजपत्ते के 2-3 पत्तों को आधा कप पानी या चाय में उबालकर पीने से जुकाम व खांसी में आराम मिलता है।डायबिटीज रोग में इसकी पत्तियों का पाउडर एक महीने तक प्रयोग करने से रक्त में ग्लूकोज और कोलेस्ट्रोल के स्तर में कमी आती है। इस पाउडर से हफ्ते में दो बार मंजन करने से दांतों की चमक व सफेदी बनी रहती है। अनिद्रा की समस्या में तेजपत्ते के थोड़े से पाउडर को पानी में मिलाकर रात को सोने से पहले लें। इसके 1-2 पत्तों को एक कप पानी में उबाल लें। आधा होने के बाद ठंडा होने पर पीने से कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी आती है लेकिन इसके प्रयोग के दौरान तली-भुनी चीजें न खाएं।पेट में इंफेक्शन होने पर तेजपत्ते को सब्जी में प्रयोग करें।कफ के लिए इसके दो पत्तों को कूटकर चाय या दूध
इन आदतों से फैलता है संक्रमण

इन आदतों से फैलता है संक्रमण

Health
अतिसूक्ष्म जीवों की अपनी एक अलग ही दुनिया है जिसमें अच्छे जीवाणु भी हैं और बुरे रोगाणु-कीटाणु भी। जिन्हें सामान्य भाषा में कहते हैं। साधारण सर्दी से भयंकर कैंसर तक फैलाने वाले ये रोगाणु अपने आप नहीं फैलते बल्कि इन्हें चाहिए होता है कोई वाहक या माध्यम। दुर्भाग्य से इंसानों की लापरवाही और आदतें इनके फैलने और बढऩे का प्रमुख कारण हैं। हैरानी की बात यह भी है कि हम इंसानों ने बजाय अपनी आदतों पर ध्यान देने के दर्जनों ऐसे नियम बना लिए हैं जो रोगाणुओं से तो नहीं बचाते लेकिन इंसानों को मनोरोगी जरूर बना देते हैं। आइए जानें कैसे फैलते हैं रोगाणु? त्वचा से चीजों का संपर्क - दरवाजों-कुर्सियों के हैंडल से, कम्प्यूटर कीबोर्ड, मोबाइल फोन आदि को छूने से संक्रमण फैलता है। त्वचा से त्वचा तक संपर्क - 77% लोग खाने के बाद हाथ नहीं धोते इस लिए जब आप उनसे हाथ मिलाते हैं तो संक्रमण आप तक पहुंच जाता है। भोजन से - अध
एक और महिला का आरोप: सरकारी अस्पताल में खून चढ़ाने के बाद एचआईवी संक्रमण हुआ

एक और महिला का आरोप: सरकारी अस्पताल में खून चढ़ाने के बाद एचआईवी संक्रमण हुआ

India
चेन्नई. तमिलनाडु के स्वास्थ्य महकमे में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया। एक महिला ने शुक्रवार को तमिलनाडु के टीवी चैनलों से कहा कि किलपौक मेडिकल कॉलेज में उसे खून चढ़ाया गया। इसके कुछ महीने बाद अस्पताल ने उसे एचआईवी संक्रमित होने की सूचना दी और टेस्ट के लिए बुलाया। हालांकि, मेडिकल कॉलेज ने महिला के आरोपों से इनकार किया है।ये भी पढ़ेंएचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने का मामला: सरकार को नोटिस, डोनर ने खुदकुशी की कोशिश कीऐसा ही एक और वाकया सत्तूर में सामने आया है, जहां महिला को खून चढ़ाया गया और वह एचआईवी संक्रमित हो गई। इस मामले में मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को नोटिस भी भेजा है।इसी साल अप्रैल में चढ़ाया गया था खूनताजा मामले में महिला ने कहा, "अस्पताल में उसे हीमोग्लोबिन कम होने के चलते खून चढ़ाया गया था। यह घटना अप्रैल में हुई थी, इस दौरान मैंगर्भवती थी। मुझे एचआईवी संक्र
पीजीआई में डायबिटीज के मरीज भी करा सकेंगे दांतों के संक्रमण का इलाज

पीजीआई में डायबिटीज के मरीज भी करा सकेंगे दांतों के संक्रमण का इलाज

Haryana
शनि शर्मा (रोहतक).डायबिटीज के मरीजों को दांतों का उपचार कराने के लिए घाव न भरने से घबराने की जरूरत नहीं है। अब डायबिटीज के मरीज भी पीजीआई के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल कॉलेज में दांतों की आरसीटी यानि रूट कनाल ट्रीटमेंट करा सकेंगे।पीजीआईडीएस के डॉक्टरों ने रिसर्च कर साबित कर दिया है कि डायबिटीज के मरीजों का आरसीटी के जरिए उपचार संभव है। इस रिसर्च को यूएसए के प्रतिष्ठित जरनल ऑफ एंडोडोंटिक्स में प्रकाशित किया गया है। पीजीआईडीएस के प्रिंसिपल डॉ. संजय तिवारी ने बताया कि संस्थान में करीब एक साल पहले डायबिटीज से पीड़ित एक मरीज दांतों की आरसीटी कराने आया था। आरसीटी की जरूरत उस समय पड़ती है, जब दांत में संक्रमण फैलकर नस से हड्डी तक चला जाता है। ऐसे में मरीज को असहनीय दर्द होता है।मरीज की जांच में सामने आया कि उसे डायबिटीज भी है। इसके बाद भी डॉक्टरों ने मरीज का उपचार किया
अब सोने से होगा घुटने का रिप्लेसमेंट, संक्रमण का खतरा होगा कम

अब सोने से होगा घुटने का रिप्लेसमेंट, संक्रमण का खतरा होगा कम

Health
घुटने की गंभीर बीमारी से पीड़ितों के लिए खुशखबरी है। अब मेटल के साथ सोने से तैयार घुटने भी मरीज में प्रत्यारोपित किए जा सकेंगे। गोमतीनगर स्थित मेयो मेडिकल सेंटर ने एक मरीज में सोने का घुटना... Live Hindustan Rss feed
एमडीएमएच स्वाइन फ्लू वार्ड की खिड़की खुली होने से संक्रमण का खतरा

एमडीएमएच स्वाइन फ्लू वार्ड की खिड़की खुली होने से संक्रमण का खतरा

Rajasthan
जोधपुर| मथुरादास माथुर अस्पताल में बने स्वाइन फ्लू वार्ड में एक खिड़की के हमेशा खुले रहने के चलते संक्रमण फैलने का खतरा है। चिकित्सा विभाग जहां स्वाइन फ्लू की रोकथाम को लेकर लाखों रुपए खर्चने के साथ कई जतन कर रहा है, वहीं अस्पताल प्रशासन इस खिड़की को सही नहीं करवा पा रहा है। गंभीर बात यह है कि यह खिड़की अस्पताल के गलियारे की तरफ खुलती है, जिससे अंदर भर्ती मरीजों के वायरस से गलियारे से गुजरने वाले व्यक्तियों को संक्रमित कर सकते हैं। स्वाइन फ्लू वार्ड में कार्यरत डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ हमेशा विशेष मास्क और गाउन पहनकर ड्यूटी करते हैं, लेकिन वार्ड में खुली रहने वाली खिड़की से अन्य मरीजों व लोगों को खतरा हो सकता है। गौरतलब है कि स्वाइन फ्लू के मरीजों को विशेष स्वास्थ्य सुविधा देने के लिहाज से आइसोलेशन वार्ड बनाकर सामान्य और संदिग्ध मरीजों से भी दूर रखा जाता है। ऐसेे मरीजों