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Tag: समस्या

ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर करते हैं ये योगासन

ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर करते हैं ये योगासन

Health
हाई ब्लड प्रेशर की तरह ही लो ब्लड प्रेशर भी नुकसानदायक है। आजकल युवा इससे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। लो बीपी की स्थिति में शरीर में रक्तसंचार धीमा होने से जरूरी अंगों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता। जिससे चक्कर आने, आंखों के सामने अंधेरा व बेहोशी छाने, हृदयगति बढऩे, सिरदर्द, हाथ-पैर ठंडे पड़ने व थकान जैसे लक्षण महसूस होते हैं।संतुलित आहार लेने और कुछ योगासनों के अभ्यास से परेशानी में राहत मिलती है। नौकासन ऐसे करें: पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को एकसाथ जोड़ें। दोनों हाथों को शरीर के पास स्पर्श करें। सांस छोड़ते हुए हाथों को पैरों की तरफ खींचें। पैर-छाती ऊपर उठाएं। इस दौरान आंखें, हाथ-पैरों की अंगुलियां एक सीध में हों। पेट की मांसपेशियों के सिकुडऩे के साथ नाभि पर हो रहे खिंचाव को महसूस करें। गहरी सांस लेते हुए इस अवस्था में कुछ देर रुकें। सांस छोड़ते हुए प्रारंभिक अवस्था में आ
पानी की समस्या से परेशान पार्षद चढ़ा टंकी पर, पेट्रोल छिड़क आत्म दाह की दी चेतावनी

पानी की समस्या से परेशान पार्षद चढ़ा टंकी पर, पेट्रोल छिड़क आत्म दाह की दी चेतावनी

Rajasthan
मनीष बावलिया.अलवर. वार्ड नंबर 30 से निर्दलीय पार्षद पानी की समस्या से परेशान होकर स्थानीय महिलाओं के साथ सोनावा की डूंगरी स्थित पानी की टंकी की छत पर जाकर गुरुवार की सुबह बैठ गया। पार्षद अपने साथ 1 कैन में पेट्रोल ले गया और अधिकारियों कि नहीं सुनने और कार्यवाही नहीं करने पर आत्मदाह की चेतावनी दी।सूचना पर मौके पर पहुंची अरावली विहार थाना पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद समझाइश कर टंकी पर चढ़े पार्षद व स्थानीय लोगों को नीचे उतारा और जलदाय विभाग के अधिकारी को बुलाकर उनसे वार्ता करवाई। वही पार्षद सुधीर यादव ने आरोप लगाया कि उनके वार्ड में करीब 2 महीने से पानी की समस्या बनी हुई है अधिकारियों को बार-बार शिकायत के बावजूद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। जिससे परेशान होकर उन्होंने यह कदम उठाया। वही मोके पर पहुचे जलदाय विभाग के अधिकारियों ने जल्दी की समस्या का निस्तारण करने का आश्वासन दि
Diverticulitis : जानिए पेट में होने वाले दर्द व कब्ज की समस्या के बारे में

Diverticulitis : जानिए पेट में होने वाले दर्द व कब्ज की समस्या के बारे में

Health
Diverticulitis : बुजुर्गों को अक्सर मौसम में बदलाव होने से पेट संबंधी दिक्कतें होती हैं। आमतौर पर खानपान में गड़बड़ी से ऐसा होता है। लेकिन 40-60 वर्ष की उम्र के बाद ज्यादातर लोगों में पेट से जुड़ी समस्याएं सामने आने लगती हैं। इसे डाइवर्टिकुलाइटिस (Diverticulitis ) कहते हैं। जानते हैं इसके लक्षण व इलाज के बारे में- डाइवर्टिकुलाइटिस बीमारी में आंतों की लाइनिंग पर मौजूद गोलाकार पाउच आंतों के बाहर उभरने लगते हैं। ये कमजोर लाइनिंग पर उभरते हैं। इस स्थिति में संक्रमण और सूजन देखने में आती है। 40-60 की उम्र में पेट संबंधी रोग बढ़ जाते हैं। यह बीमारी इनमें से एक है। कारण-रोग के कारण अज्ञात हैं। लेकिन अधिकतर मामलों में भोजन में फाइबरयुक्त चीजों का अभाव या शरीर में पानी की कमी इसकी मुख्य वजह है। क्योंकि फाइबर व पानी की कमी से मल सख्त हो जाता है और धीरे-धीरे आंतों पर दबाव पड़ता है। कब्ज व मोटापा इस
बालों में डैंड्रफ से हैं परेशान तो करें ये उपाय, दूर होगी समस्या

बालों में डैंड्रफ से हैं परेशान तो करें ये उपाय, दूर होगी समस्या

Health
गीले बालों में तेल लगाने से फंगल इंफेक्शन हो सकता है। इससे बचने के लिए जो भी हेयर ऑयल प्रयोग करते हैं उसे गुनगुना कर कर्पूर मिला लें। उससे बालों की मालिश करें। इसके लिए नारियल तेल, सरसों व बादाम तेल का प्रयोग कर सकते हैं। यदि डैंड्रफ हुआ है तो नीम, अरंड का तेल प्रयोग करें। मैंथी रात में भिगो दें। सुबह इसे पीसकर बालों में लगाएं। इससे डैंड्रफ कम होगा। इसे सप्ताह में दो बार प्रयोग करें। नीम के पत्ते व त्रिफला के काढ़े से बाल धोने से खुजली से आराम मिलता है। बाल रहेंगे हैल्दी बालों की नमी अच्छे से दूर करें। नहाने के बाद तौलिए से पोंछें। यदि कैप लगाते हैं तो पसीने को सुखाएं या शाम को अच्छे से नहाएं। बालों को साफ रखने से फंगल संक्रमण का खतरा कम हो जाएगा। दूसरे की तौलिया, तकिया, कंघी का इस्तेमाल न करें। तकिया सप्ताह में एक बार जरूर धोएं। बालों में तेल लगाने के बाद तीन-चार घंटे बाद वॉश करना चाहिए।
मस्तिष्क की इस समस्या के कारण आते हैं डरावने सपने, जानें इसके बारे में

मस्तिष्क की इस समस्या के कारण आते हैं डरावने सपने, जानें इसके बारे में

Health
सोते समय कई बार लोग डरावने सपनों से डरकर अचानक उठ जाते हैं। बच्चे इस कारण एकदम से उठकर घबराहट में रोने व कांपने लगते हैं। ऐसा कभी कभार होना सामान्य है लेकिन लगातार होना नाइटमेयर डिसऑर्डर कहलाता है। मेडिकली यह एक तरह का मानसिक विकार है। जिसका इलाज सही समय पर होना चाहिए। जानें इसके बारे में- बुरे सपने के बाद यदि -जिंदगी में कभी न कभी सभी को बुरे सपने आते हैं जो थोड़ी देर या पूरे दिन के लिए जहन में रहते हैं। लेकिन यदि व्यक्ति को बार-बार ऐसे सपनों के आने के बाद सोने से खौफ होने लगे तो यह एक मानसिक विकार बनकर उभरता है। इसे नाइटमेयर डिसऑर्डर या पेरासोम्निया भी कहते हैं। किसी भी वर्ग के व्यक्ति को यह समस्या हो सकती है। इन सपनों से व्यक्ति की नींद टूटने के साथ हड़बड़ाहट, घबराहट, धड़कनें तेज होना और गहरी-गहरी सांस लेने जैसी तकलीफें होने लगती हैं। ऐसा कुछ सेकंड से लेकर मिनटों तक होने के बाद सामान्य

Poco F1 में आई टच-स्क्रीन की समस्या, कंपनी ने जांच के लिए मंगाया फोन

Indian Technology
पोको एफ1 के जिन यूनिट्स में टच की दिक्कत आ रही है, कंपनी उन फोन की जांच करेगी। इसके लिए फोन को वापस मंगाया जाएगा। बता दें कि पोको एफ1 यूजर्स ने स्क्रीन के फ्रीज होने, टच काम नहीं करने और टाइपिंग के दौरान हैंग होने की शिकायत की है। Latest And Breaking Hindi News Headlines, News In Hindi | अमर उजाला हिंदी न्यूज़ | - Amar Ujala
Pregnancy Problems: जानें गर्भावस्था में एसिडिटी, उल्टी व अल्सर की समस्या व इलाज

Pregnancy Problems: जानें गर्भावस्था में एसिडिटी, उल्टी व अल्सर की समस्या व इलाज

Health
pregnancy Problems: pregnancy complications: गर्भावस्था में महिला को अक्सर शुरुआती माह में उल्टी व एसिडिटी की समस्या होती है। ऐसा प्रेग्नेंसी के दौरान प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन का स्तर बढ़ने से आंतों में हुए कुछ बदलाव हैं। जैसे गर्भाशय का आकार बढ़ने से पेट में दबाव, फूडपाइप की मांसपेशियों का संकुचन व निचले भाग के वॉल्व में तनाव कम होना आदि। मिचली-उल्टी -यह गर्भावस्था में 60-70 फीसदी महिलाओं को होती है। इस दौरान दर्द निवारक दवा न लें।कब : प्रेग्नेंसी के पहले महीने के अंत में शुरू होकर तीसरे माह के खत्म होते-होते अधिक होती है।लक्षण : बार-बार उल्टी की स्थिति को हाइपरमेसिस गे्रविडेरम कहते हैं। डिहाइडे्रशन भी हो सकता है।इलाज :डॉक्टरी सलाह से दवा लें। खाली पेट न रहें, थोड़ा-थोड़ा आहार लेते रहें। तेल, मसाले युक्तआहार न लें। भोजन, गंध, तनाव एवं उल्टी का कारण बनने वाली काम, चीजों से बचें। चिकित्सक से
Endometriosis: महिलाओं की इस समस्या में होते हैं माहवारी जैसे लक्षण, जानें इसके बारे में

Endometriosis: महिलाओं की इस समस्या में होते हैं माहवारी जैसे लक्षण, जानें इसके बारे में

Health
Endometriosis: एंडोमेट्रियोसिस के लक्षणों में दर्द, अधिक रक्तस्त्राव व क्रॉनिक पैल्विक दर्द शामिल है। एंडोमेट्रियोसिस क्या है ?यह समस्या महिला में प्रजनन अंगों को प्रभावित करती है। जो गर्भाशय में सामान्य रूप से लाइनिंग बनाने वाले एंड्रोमेट्रियम ऊत्तक के गर्भाशय के बाहर बढ़ने के कारण होता है। इसमें माहवारी के दौरान ऊत्तकों में भी ब्लीडिंग होने से ब्लड ओवरी में जमकर गांठ का रूप ले लेता है। एक अनुमान के अनुसार, 10 में से एक महिला को उनके प्रजनन सालों (आमतौर पर 15 से 49 वर्ष की उम्र के बीच) में यह दिक्कत हो सकती है। इसके लक्षण क्या हैं ?इसके लक्षण आमतौर पर माहवारी जैसे होते हैं। जैसे माहवारी के दौरान तेज दर्द, क्रॉनिक पैल्विक दर्द, शारीरिक संपर्क के दौरान या बाद में दर्द, पेट के पास या निचले हिस्से में तेज दर्द होता है। इससे पीड़ित महिला को इसके कारण लगातार थकावट रहती है व यूरिन के दौरान परेशा
जानिए आंखों में क्यों होती है खुजली, लाल होने व पानी निकलने की समस्या

जानिए आंखों में क्यों होती है खुजली, लाल होने व पानी निकलने की समस्या

Health
मौसमी बदलाव त्वचा के अलावा आंखों में ड्रायनेस बढ़ाता है। धूल-धुआं, पौधों के परागकण, प्रदूषण से एलर्जी या आंखों की पलकों पर मौजूद चिकनाई के सूखने से ऐसा होता है। इससे आंखों के लाल होने, खुजली व पानी निकलने जैसे लक्षण सामने आते हैं। एलर्जी -मरीज को एलर्जी वाली चीजों से दूरी बनाने और एलर्जी के मरीज को सर्दी शुरू होने से दो हफ्ते या एक माह पहले से एंटीएलर्जिक दवाएं लेने की सलाह देते हैं। ड्रायनेस -हवा के सीधे संपर्क में आने या हीटर के एकदम पास बैठने से आंखों की नमी कम हो जाती है। जिससे आंखों में ड्रायनेस होती है। इसके अलावा ड्राइविंग के दौरान या कहीं धुआं या धूल में घर से बाहर निकलते समय आंखों पर चश्मा लगाएं। या कम्प्यूटर पर काम करने के दौरान बीच-बीच में आर्टिफिशियल टियर ड्रॉप आंख में डालें। कंजक्टिवाइटिस -वायरल इंफेक्शन का खतरा बढ़ने से आंख में कंजक्टिवाइटिस होना आम है। जिनकी हाल में आंख संबं
बच्चों में खांसी की समस्या काे दूर करेंगी जड़ी-बूटियां

बच्चों में खांसी की समस्या काे दूर करेंगी जड़ी-बूटियां

Health
बदलते माैसम में अक्सर बच्चे सुबह उठते ही या सोते हुए अचानक तेज-तेज खांसने लगते हैं। यह खांसी उन्हें कई बार इतनी तेज होती है कि वे रोने तक लगते हैं और सोते समय उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। इसका कारण श्वासनली से जुड़ा संक्रमण है जो बार-बार ली जाने वाली एंटीबायोटिक्स से कम हुई रोग प्रतिरोधक क्षमता से होता है। इसके अलावा सर्द हवाओं के ज्यादा संपर्क में रहने या ठंडा पानी पीने से श्वासनली सिकुड़ जाती है। आयुर्वेद में अडू़सा, हल्दी, अजवाइन, तुलसी, अदरक, छोटी पिप्पली जैसी कई जड़ी-बूटियां इम्यूनिटी बढ़ाकर नलियों की सिकुड़न दूर कर कफ बाहर निकालती हैं।अाइए जानते हैं आयुर्वेदिक नुस्खाें के बारे में :- आयुर्वेदिक नुस्खे- एक साल तक के बच्चे को शितोप्लाधी चूर्ण की आधा चम्मच मात्रा में थोड़ा शहद मिलाएं। इस मिश्रण को चाटने से भी फायदा होता है। - एक कप पानी में अड़ूसा के कुछ पत्ते उबालें। पानी के आध