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Tag: समस्या

गर्भाशय के अंदर हो समस्या तो इससे होती है जांच

गर्भाशय के अंदर हो समस्या तो इससे होती है जांच

Health
क्या है दूरबीन विधिहिस्ट्रोस्कोपी यानी दूरबीन विधि में गर्भाशय में देखा जाता है कि क्या समस्या है। इसमें बांझपन की पड़ताल की जाती है। किस वजह से मरीज को माहवारी की समस्या हो रही है या फिर बहुत ज्यादा माहवारी आ रही है। कई बार प्रेग्नेंसी की भी समस्या होती है। इन सब समस्याओं में हिस्ट्रोस्कोपी से गर्भाशय के अंदर देखते हैं और यदि वहां पर कोई समस्या दिखाई देती है तो उनका इलाज भी करते हैं।कई बीमारियों में उपयोगीहिस्ट्रोस्कोपी से गर्भाशय के बारेे में जानकारी मिलती है। गर्भाशय की ट्यूब में रुकावट व ट्यूमर का पता लगाया जा सकता है। गर्भाशय के अंदर की जो केविटी होती है। उसमें पोलिप है या फिर बच्चेदानी की दीवारें अंदर से चिपक गई है या माहवारी की अनियमितता है या बॉयोप्सी लेनी है तो दूरबीन से देखकर लेते हैं। इसमें सर्जरी नहीं जाती है। मरीज को दर्द से बचाने के लिए एनेस्थीसिया दिया जाता है। पीसीओडी में फ
Health Alert : कम उम्र के लोगों में तेजी से बढ़ रही पार्किंसन की समस्या

Health Alert : कम उम्र के लोगों में तेजी से बढ़ रही पार्किंसन की समस्या

Health
पार्किंसन की समस्या अब अधिक उम्र के लोगों की समस्या नहीं रही। अब कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। आखिर क्या है इसकी वजह और क्या हैं इससे बचाव के उपाय, जानें इस आलेख मेंअगर किसी अपने... Live Hindustan Rss feed
बालों व स्किन की समस्या है तो ये खाएं

बालों व स्किन की समस्या है तो ये खाएं

Health
सेहत के लिए फायदेमंदखजूर एक तरह का मेवा है। खजूर में आयरन, मिनरल्स, कैल्शियम, अमीनो एसिड, फॉस्फोरस और विटामिन्स होते हैं। ये सेहत के साथ स्किन और बालों के लिए भी बहुत फायदेमंद है। इसको खाने से शरीर को कई पोषक तत्व मिलते हैं। इसके नियमित प्रयोग से कई बीमारियां में भी लाभ मिलता है।ये भी पढ़े: जापानी कंपनी ने दिया था आइडिया, अब वॉक का बना पैमानापोषक तत्त्व : 100 ग्राम खजूर मेें कार्बोहायड्रेट 75 ग्राम, फाइबर 6.7 ग्राम, वसा 0.4 ग्राम, सोडियम 2 ग्राम, पोटैशियम 656 मिलीग्राम है। ये भी पढ़े: स्वाइन फ्लू के मरीजों की तीन श्रेणियों के अनुसार करते हैं जांच व इलाजदिल, दिमाग के रोगों में फायदेमंद: खजूर दिल से जुड़ी समस्याओं से बचाव करने में कारगार है। ये इम्युनिटी बढ़ता है। एक महीने तक लगातार खाने से हिमोग्लोबिन में वृद्धि होती है। पोटेशियम दिमाग के लिए फायदेमंद है। ये भी पढ़े : शरीर में बढ़ती जा रही
थायरॉइड की समस्या में ये होती हैं दिक्कत

थायरॉइड की समस्या में ये होती हैं दिक्कत

Health
थायरॉइड के ये हैं कामथायरॉइड ग्रन्थि गले में सांस नली के ऊपर और वोकल कॉर्ड के दोनों ओर दो भागों में विभाजित तितली के आकार जैसी होती है। यह एंडोक्राइन ग्लैंड थाइराक्सिन नाम का हार्मोन बनाती है जिससे शरीर में प्रोटीन व एनर्जी सुचारू रहती है। थायरॉइड ग्लैंड के कम या ज्यादा काम करने से शरीर का वजन तेजी से बढऩे या घटने लगता है। इससे बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता है। थायरॉइड होने पर पीड़ि़त को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके रोगी बढ़ते जा रहे हैं। यदि किसी को थायरॉइड की समस्या है तो आयुर्वेदिक दवाएं व नुस्खे थायरॉइड को ठीक करने में मददगार हैं।थायरॉइड के कारण: अनियमित दिनचर्या, भोजन में आयोडीन की कमी या अधिकता, तनाव, इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी, आनुवांशिक कारण, दवाओं का प्रतिकूल प्रभाव आदि थायरॉइड रोग के प्रमुख कारण हैं। जांच: रक्त के नमूने से टीथ्री, टीफोर, टीए
मिडिल ऑर्डर की समस्या सुलझाना सबसे बड़ी चुनौती

मिडिल ऑर्डर की समस्या सुलझाना सबसे बड़ी चुनौती

Indian Sports
खेल डेस्क. एशिया कप में भारत की खिताबी जीत तारीफ के योग्य है। लेकिन, टूर्नामेंट में प्रदर्शन खिलाड़ियों और टीम के बारे में कई सवाल भी खड़े करता है। वर्ल्ड कप सिर्फ नौ महीने दूर है और ऐसे में ये सवाल चयनकर्ताओं के साथ-साथ कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री के लिए विचार का विषय हो सकते हैं।फाइनल में सामने आई समस्याएं: फाइनल मुकाबले से वे समस्याएं और उलझन सामने आई हैं, जिनसे इन लोगों को रूबरू होना है। मैच काफी रोमांचक था और भारत ने बेहद करीबी मुकाबले में जीत हासिल की। लिटन दास के शतक के बावजूद बांग्लादेश को 222 रन पर समेटने के बाद भारत की बल्लेबाजी में कई खामियां दिखीं। टीम को जीत के लिए लंगड़ाते हुए केदार जाधव की जरूरत पड़ी जो पहले रिटायर्ड हर्ट होकर पवेलियन लौट चुके थे।पाकिस्तान के खिलाफ मिली सबसे आसान जीत: वैसे तो भारतीय टीम टूर्नामेंट में अजेय रही, लेकिन फाइनल कोई इकलौ
धूम्रपान के कारण तेजी से बढ़ती है सोराइसिस की समस्या

धूम्रपान के कारण तेजी से बढ़ती है सोराइसिस की समस्या

Health
धूम्रपान से सोराइसिस का खतरा दोगुना हो जाता है, क्योंकि निकोटिन के चलते त्वचा की निचली परत में रक्त संचार बाधित हो जाता है और त्वचा को ऑक्सीजन कम मिलती है। ऐसा विशेषज्ञों का कहना है। 'निकोटिन रक्त को त्वचा की निचली परत में जाने से रोकता है, इसलिए त्वचा को कम ऑक्सीजन मिलती है। इससे कोशिका उत्पादन की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे सोराइसिस जैसे रोग होते हैं। सोराइसिस पर हुए एक सर्वे के अनुसार, दुनिया में 12.5 करोड़ लोग इस रोग से पीड़ित हैं। हालिया एक अध्ययन में बताया गया है कि भारत में करीब चार से पांच फीसदी लोग सोराइसिस से पीड़ित हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि सोराइसिस का कोई एक कारण नहीं है, लेकिन यदि आपके परिवार के किसी सदस्य को सोराइसिस है, तो आपको भी इसका खतरा हो सकता है। ' लक्षण - सोराइसिस में त्वचा लाल हो जाती है और सफेद दाग उभर आते हैं। यह सिर, कुहनी, घुटने और पेट की त्वचा पर हो सकता ह
विटामिन-डी की कमी से भी होती हैं हृदय रोगों से जुड़ी समस्या

विटामिन-डी की कमी से भी होती हैं हृदय रोगों से जुड़ी समस्या

Health
हाल ही एक शोध में विटामिन-डी की कमी से हाइपरटेंशन, डायबिटीज व हृदय संबंधी रोगों की बात सामने आई है। शोध के अनुसार शरीर में जितनी ज्यादा विटामिन-डी की कमी होती है इन रोगों की आशंका उतनी अधिक बढ़ जाती है। वजह : घंटों बंद जगह या ऑफिस में समय बिताना, अधिक तनाव, पैदल चलने के बजाय वाहनों पर निर्भरता, शारीरिक श्रम की कमी, तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता, खराब खानपान आदि। जांच का पैमाना : खून की जांच में '25 हाइड्रोक्सीविटामिन-डी' का स्तर देखकर इसका पता लगाया जाता है। विशेषज्ञ इसके स्तर को इस तरह से देखते हैं-25 नैनोग्राम/मिलिलीटर से स्तर कम होने पर कमी होना।26 से 74 नैनोग्राम/मिलिलीटर के बीच स्थिति असंतोषजनक।75 से 250 नैनोग्राम/मिलिलीटर के बीच स्थिति संतोषजनक।250 नैनोग्राम/मिलिलीटर से ज्यादा विषैला क्या करें : शरीर को विटामिन-डी का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा रोजाना आधा घंटा धूप में बिताने से ही मिल जाता है
वात-पित्त के असंतुलन से होती है सोरायसिस की समस्या

वात-पित्त के असंतुलन से होती है सोरायसिस की समस्या

Health
सोरायसिस त्वचा संबंधी एेसी बीमारी है जिसमें त्वचा की कोशिकाओं में तेजी से वृद्धि होने लगती है। आयुर्वेद के मुताबिक यह समस्या वात-पित्त के असंतुलन से होती है। इसकी वजह से शरीर में विषैले तत्त्व इकट्ठे हो जाते हैं जो रक्त व मांसपेशियों के अलावा इनके अंदर के ऊत्तकों को संक्रमित करने लगते हैं। जिससे व्यक्ति इस बीमारी से ग्रसित हो जाता है। यह समस्या ज्यादातर कोहनी, घुटने व सिर की त्वचा को प्रभावित करती है। ये भी हैं कारण : आनुवांशिकता को भी इसका मुख्य कारण माना जाता है। यदि माता-पिता में से किसी एक को यह समस्या है तो बच्चे में इसका खतरा 15 प्रतिशत बढ़ जाता है। माता-पिता दोनों को एेसी परेशानी है तो बच्चे में इसकी आशंका 60 प्रतिशत तक होती है। इसके अलावा दो अलग किस्म का भोजन जैसे दूध के साथ खट्टी व नमकीन चीजें खाने, त्वचा कटने, चोट लगकर घाव होने या जलने, एलर्जी वाली दवाओं के नियमित इस्तेमाल, धूम्र

6 अप्रैल से प्रयागराज में रेल यात्रियों के लिए बढ़ी समस्या, जानिए क्या है वजह

India
इलाहाबाद जंक्शन से गुजरने वाली अलीपुर द्वार-दिल्ली महानंदा एक्सप्रेस इलाहाबाद छिवकी स्टेशन पर आने वाली इटारसी-इलाहाबाद छिवकी पैसेंजर समेत कई ट्रेनें नहीं आएंगी। Jagran Hindi News - news:national
आर्टिजम की समस्या लड़कियों की बजाय लड़कों में ज्यादा : अाहूजा

आर्टिजम की समस्या लड़कियों की बजाय लड़कों में ज्यादा : अाहूजा

Punjab
अकाल कॉलेज ऑफ एजूकेशन मस्तुआना साहिब में प्रिंसिपल डॉ. सुखदीप कौर की अगुआई में अंतरराष्ट्रीय आर्टिजम जागरूकता दिवस मनाया गया। इस मौके पर डॉ. वीके आहूजा ने बताया कि आर्टिजम पीडित बच्चे की पहचान किस तरह की जा सकती है। आर्टिजम पीड़ित बच्चे अपने हक के लिए नहीं लड़ सकते इसलिए हमें चाहिए उन बच्चों की आवाज बन उन्हें उनके बनते हक दिलाए जा सके। उन्होंने कहा कि आर्टिजम की समस्या के साथ निपटना आसान नहीं है परंतु हम कोशिश करके इसे काफी हद तक कंट्रोल कर सकते है। उन्होंने कहा कि यह समस्या लड़कों में लड़कियों के मुकाबले पांच गुणा ज्यादा होती है। आर्टिजम पीडित बच्चें को समाज में उभरने में समस्या आती है। उन्होंने कहा कि आर्टिजम पीडित बच्चे के परिजनों को डॉक्टर के साथ मिलकर एक टीम की तरह काम करना चाहिए क्योंकि बच्चा ज्यादा समय घर में ही गुजारता है। हमें समझना चाहिए कि आर्टिजम पीडित बच्चे