News That Matters

Tag: समस्या

वैश्विक समुदाय आतंकवाद की समस्या के विरोध में एकजुट होकर कार्रवाई करे : नरेंद्र मोदी

वैश्विक समुदाय आतंकवाद की समस्या के विरोध में एकजुट होकर कार्रवाई करे : नरेंद्र मोदी

Rajasthan
इंटरनेट डेस्क। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में अवन्तीपुरा के गोरीपुरा इलाके में आतंकियों ने सीआरपीएफ काफिले पर हमला कर दिया था जिस हमले में करीब 44 जवानों के शहीद हो गए इस घटना के बाद कई देशों ने इस आतंकी घटना की कड़ी नींदा की और देश की जनता ने सीमा पर कड़ी कार्यवाई करने की मांग की इसी बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुई आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा और पाकिस्तान से आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील किये जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि वैश्विक समुदाय के एकजुट होने और ठोस कार्रवाई करने का समय आ गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जेई इन के साथ संवाददाता को संबोधित करते हुए कहा कि अब समय आ गया कि वैश्विक समुदाय बातों से आगे बढ़कर इस समस्या के विरोध में एकजुट होकर कार्रवाई करे। पुलवामा हमले के
थकान मिटाने, चोट का खून रोकने और पेट की समस्या में मददगार है "मटके का पानी"

थकान मिटाने, चोट का खून रोकने और पेट की समस्या में मददगार है "मटके का पानी"

Health
आयुर्वेद में मटके के पानी को शीतल, हल्का, स्वच्छ और अमृत के समान माना गया है। यह प्राकृतिक जल का स्रोत है जो ऊष्मा से भरपूर होता है और शरीर की गतिशीलता को बनाए रखता है। मटके की मिट्टी कीटाणुनाशक होती है जो पानी में से दूषित पदार्थों को साफ करने का काम करती है।इस पानी को पीने से थकान दूर होती है। इसे पीने से पेट में भारीपन की समस्या भी नहीं होती।रक्त बहने की स्थिति में मटके के पानी को चोट या घाव पर डालने से खून बहना बंद हो जाता है। सुबह के समय इस पानी के प्रयोग से हृदय व आंखों की सेहत दुरुस्त रहती है।गला, भोजननली और पेट की जलन को दूर करने में मटके का पानी काफी उपयोगी होता है।जिन लोगों को अस्थमा की समस्या हो वे इस पानी का प्रयोग न करें क्योंकि इसकी तासीर काफी ठंडी होती है जिससे कफ या खांसी बढ़ती है। जुकाम, पसलियों में दर्द, पेट में आफरा बनने की स्थिति व शुरुआती बुखार के लक्षण होने पर मटके का
B Alert – सॉफ्ट ड्रिंक्स से भी पैदा हाेती है लिवर में फैट की समस्या

B Alert – सॉफ्ट ड्रिंक्स से भी पैदा हाेती है लिवर में फैट की समस्या

Health
आजकल की व्यस्त जीवन शैली और अस्वस्थ भोजन से कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं उन्हीं में से एक है फैटी लिवर। अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकता है।ज्यादातर फैटी लीवर की समस्या अल्कोहलिक यानी शराब पीने वालों में देखने को मिलती है या फिर यह मोटापे के कारण होता है। लेकिन कर्इ बार नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज की समस्या भी देखी जाती है। आइए जाने इसके बारे में :- नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) क्या है?यह टर्म उन लोगों के लिए इस्तेमाल की जाती है जो बहुत कम एल्कोहल लेते हैं या बिल्कुल नहीं लेते, इसके बावजूद उनके लिवर में फैट जमा हो जाता है। इसका संबंध कमर की चौड़ाई, इंसुलिन में गड़बड़ी, खून में वसा की मात्रा अधिक होने और हाई कोलेस्ट्रॉल आदि से है। लिवर में फैट जमने से इंसुलिन की उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है जिसे नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के नाम से जाना जा
एनीमिया, माहवारी की समस्या और चमकती त्वचा के लिए करें इस चीज सेवन

एनीमिया, माहवारी की समस्या और चमकती त्वचा के लिए करें इस चीज सेवन

Health
चुकंदर में फॉस्फोरस, क्लोरीन, आयोडीन, आयरन और विटामिन होते हैं। इसे खाने से हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है। इसमें मौजूद एंटीआक्सीडेंट शरीर को रोगों से बचाते हैं। चकुंदर में कार्बोहाइड्रेट होता है जो शरीर से आलस और थकान को दूर कर एनर्जी देता है।इसमें नाइट्रेट नामक तत्व होता है जो रक्त के दबाव और दिल से जुड़ी समस्याओं को कम करता है।चुकंदर खाने से खून साफ होकर त्वचा में चमक आती है। इसमें आयरन काफी ज्यादा मात्रा में होता है। यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण कर एनीमिया की समस्या नहीं होने देता।जिन महिलाओं को माहवारी से संबंधित समस्याएं हों, वे रोजाना एक गिलास चुकंदर का जूस पी सकती हैं। रोजाना एक गिलास चुकंदर, गाजर, पालक, आंवला और सेब से बना मिक्स जूस पीने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है।चुकंदर को नियमित खाने से कब्ज और बवासीर जैसे पेट संबंधी रोगों में लाभ होता है।इसे आप सलाद या सब्जी बना
इस कारण से भी हो सकती हैं खुजली, आंख से पानी, लाल चकत्ते, हरारत और छींके आने की समस्या

इस कारण से भी हो सकती हैं खुजली, आंख से पानी, लाल चकत्ते, हरारत और छींके आने की समस्या

Health
बदलते मौसम में उतार-चढ़ाव संवेदनशील व्यक्तियों को प्रभावित करता है, इसे एलर्जी कहते हैं। इससे सांस लेने में तकलीफ, शरीर पर लाल चकते, नाक व आंख से पानी आना, आंख या किसी अंग में खुजली, लगातार छींके व हरारत होती है। एलर्जी एक आनुवांशिक रोग है। जब रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) कमजोर हो जाती है तो एलर्जी अपना प्रभाव दिखाने लगती है। आइये जानते हैं इससे बचने के उपायों के बारे में। कारण : धूल-मिट्टी, पेड़ों से निकलने वाले परागकण, खाद्य पदार्थ जैसे दूध से बनी चीजें, ड्राईफ्रूट्स, सोयाबीन व अनाज, दवाओं, ब्यूटी उत्पाद या पालतू जानवरों से एलर्जी हो सकती है। उपचार व सावधानी - धूल और धुएं से बचें। गाड़ी चलाते हुए या बाहर जाते समय मुंह पर कपड़ा व आंखों पर चश्मा लगाएं। घर में नमी न होने दें। होम्योपैथिक इलाज के लिए सैबेडिला, ब्रोमियम, जैल्सीमियम, एरेलिया, मर्कसौल, एलियम सीपा आर्सेनिक एल्बम व सोराइनम दव
एक दशक में पचास से अधिक मिग गंवा चुकी है इंडियन एयर फोर्स, समस्या बने बुढ़ाते फाइटर जेट

एक दशक में पचास से अधिक मिग गंवा चुकी है इंडियन एयर फोर्स, समस्या बने बुढ़ाते फाइटर जेट

Rajasthan
जोधपुर. इंडियन एयरफोर्स ने मंगलवार को बहादुर के नाम से प्रसिद्ध अपना एक मिग-27 फाइटर जेट गंवा दिया। वायुसेना के बुढ़े होते विमान अब उसके लिए समस्या बनते जा रहे हैं। विशेष रूप से मिग श्रेणी के विमानों के हादसे लगातार बढ़ रहे हैं।बीते एक दशक में वायुसेना मिग श्रेणी के पचास से अधिक विमान गंवा चुकी है। वर्ष 2015 के बाद एयरफोर्स 22 विमान गंवा चुकी है। इन 22 हादसों में चालीस जवान व पायलट्स भी अपनी जान गंवा चुके है। वहीं, नए विमान नहीं मिलने के कारण पायलट्स के पास अपनी जान जोखिम में डाल इन विमानों को उड़ाने के सिवाए कोई विकल्प नहीं है।वायुसेना को नए लड़ाकू विमान मिलने में काफी विलम्ब हो रहा है। ऐसे में उसका हवाई बेड़ा दिनों दिन सिकुड़ता जा रहा है। उसके पास 42 के स्थान पर अब महज 32 स्कवाड्रन का बेड़ा ही रह गया। ऐसे में हादसों के बावजूद मिग श्रेणी के विमानों को मजबूरी में रिटायर्ड नहीं
अगर आप भी पीते हैं कम पानी तो हो सकती है गुर्दे से जुड़ी ये समस्या

अगर आप भी पीते हैं कम पानी तो हो सकती है गुर्दे से जुड़ी ये समस्या

Health
पथरी का शरीर में बार-बार बनना सेहत के लिए सही नहीं। पथरी बनने की प्रक्रिया बहुत धीमी होती है और जब इसका आकार बढ़ जाता है तो पीठ में दोनों ओर दर्द शुरू होकर आगे की तरफ आता है। तेज दर्द के साथ उल्टी, पेशाब में जलन और पेशाब रुक-रुक कर आना भी इसके लक्षण हो सकते हैं। प्रमुख वजह - गुर्दे यानी किडनी की पथरी का मुख्य कारण है पानी कम पीना। यह तब होती है जब शरीर में पानी, नमक व मिनरल्स का संतुलन बिगड़ जाता है। जिन लोगों को गठिया यानी गाउट होता है, उनमें भी पथरी अधिक बनती है। बीजयुक्त सब्जियों जैसे बैंगन, टमाटर, भिंडी, मसाले वाला भोजन, जंकफूड व चाय अधिक पीने से भी पथरी हो सकती हैै। बार-बार बुखार या टायफॉइड से किडनी कमजोर होने पर पथरी की आशंका रहती है। ये हैं प्रकारकैल्शियम स्टोन : पानी कम पीने और कैल्शियम डाइट ज्यादा लेने से 20-30 वर्ष की उम्र में यह ज्यादा बनती है।सिस्टीन स्टोन : जो सिस्टीनूरिया (जब
मां बनने योग्य आयु की आधी से ज्यादा महिलाओं को है यह समस्या

मां बनने योग्य आयु की आधी से ज्यादा महिलाओं को है यह समस्या

Health
सरकार ने स्वीकार किया है कि देश में मां बनने योग्य आयुवर्ग (15 से 49 साल) वाली 53 प्रतिशत महिलायें खून की कमी (रक्ताल्पता) की शिकार हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने... Live Hindustan Rss feed
सिरदर्द की समस्या के लिए ये हैं मुख्य वजह

सिरदर्द की समस्या के लिए ये हैं मुख्य वजह

Health
सिरदर्द की समस्या अब 5-14 वर्ष की उम्र के बच्चों को ज्यादा होने लगी है। ऐसा कई कारणों से होता है, जानते हैं उनके बारे में। प्रमुख वजह : बुखार या उससे जुड़े वायरल इंफेक्शन, सायनस में संक्रमण, बैक्टीरियल इंफेक्शन से टॉन्सिल्स बढ़ने पर, तनाव, नींद पूरी न होने से, भूखे रहने से ब्लड शुगर लेवल कम होने पर, सिर में गांठ या चोट लगने से, माइग्रेन, कम उम्र में ही चश्मा लग जाने और आंखों से संबंधित कोई परेशानी होने पर बच्चों को सिरदर्द की समस्या हो सकती है। लेकिन बच्चे को अगर सुबह उठते ही सिरदर्द, उल्टी, चक्कर या एक ही चीज दो-दो दिखने लगे तो उसे फौरन डॉक्टर के पास लेकर जाएं। ध्यान रहें ये बातें - शिशु रोग विशेषज्ञ के अनुसार जिन बच्चों को माइग्रेन हो उन्हें शांत और अंधेरे कमरे में सुलाएं जिससे उन्हें नींद ठीक से आए। ऐसे बच्चे जिन्हें चॉकलेट खाने से सिरदर्द की समस्या हो, उन्हें इससे परहेज कराएं ताकि रोग
टेक्नोलॉजी गैजेट्स के ज्यादा इस्तेमाल से हो सकती है इनफर्टिलिटी की समस्या

टेक्नोलॉजी गैजेट्स के ज्यादा इस्तेमाल से हो सकती है इनफर्टिलिटी की समस्या

Health
अध्ययन बताते हैं कि मोबाइल फोन एवं उनके टावरों से उत्सर्जित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरण के असर से डीएनए क्षतिग्रस्त होता है और वह स्वयं अपनी मरम्मत नहीं कर पाता। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर गिर जाता है और कोशिकाओं को नुकसान होने के साथ ही कई दुष्प्रभाव होते हैं। लेकिन इनमें सबसे ज्यादा गंभीर जोखिम है इनफर्टिलिटी। लगभग 15 प्रतिशत भारतीय दंपति किसी न किसी किस्म की इनफर्टिलिटी से जूझते हैं। अध्ययन बताते हैं कि मोबाइल फोन इस्तेमाल का संबंध पुरुषों में शुक्राणुओं के कम उत्पादन व उनकी निम्र गुणवत्ता से है जबकि गर्भस्थ महिलाओं व उनके अजन्मे शिशु के लिए सेल्युलर रेडिएशन का संपर्क खतरनाक होता है। इससे गर्भस्थ शिशु की रीढ़ पर बुरा असर पड़ता है। रेडिएशन से डीएनए के गुणसूत्र क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और जीन्स की गतिविधि में बदलाव आ जाता है। आज के दौर में मोबाइल फोन व