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एनीडेस्क एप डाउनलोड न करें, खाता खाली हो जाएगा

एनीडेस्क एप डाउनलोड न करें, खाता खाली हो जाएगा

Delhi
एजेंसी | नई दिल्ली. आरबीआई ने मोबाइल फोन के जरिए लेन-देन करने वालों को पर नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करने वालों को कोई भी नया एप इंस्टाल करते वक्त सावधानी बरतने को कहा है। आरबीआई के अनुसार प्लेस्टोर और एपस्टोर में मौजूद एनीडेस्क जैसे कई एप यूपीआई और मोबाइल वॉलेट के जरिए मिनटों में आपका पैसा उड़ा सकते हैं। आरबीआई ने 14 फरवरी को जारी एक अलर्ट में कहा है, ‘यूपीआई प्लेटफॉर्म पर लेन-देन करने वालों के साथ धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं। मोबाइल फोन को रिमोट एक्सेस पर लेकर धोखे से बैंक खाते से पैसे निकालने का नया हथकंडा भी इन दिनों सामने आया है।’ आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया है कि ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए इस बारे में जागरूक करें। सोशल मीडिया पर इस तरह की एप को लेकर शिकायतें सामने आईं थीं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
बोर्ड परीक्षा में अब केंद्राधीक्षक भी नहीं रख सकेंगे स्मार्ट मोबाइल, ताकि कोई गड़बड़ी नहीं हो सके

बोर्ड परीक्षा में अब केंद्राधीक्षक भी नहीं रख सकेंगे स्मार्ट मोबाइल, ताकि कोई गड़बड़ी नहीं हो सके

Rajasthan
बारां| माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं में केंद्राधीक्षक इस बार स्मार्ट मोबाइल नहीं रख सकेंगे। सूत्रों ने बताया कि रीट परीक्षा के दौरान पिछले दिनों एक-दो केंद्रों पर हुई गड़बड़ी को देखते हुए बोर्ड ने यह निर्णय गत दिनों हुई बैठक में लिया है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बोर्ड परीक्षा को लेकर ये विशेष बैठक बुलाई थी, जिसमें प्रदेश के समस्त संयुक्त निदेशक एवं डीईओ माध्यमिक ने भाग लिया था। प्रदेश में बोर्ड परीक्षा सात मार्च से शुरू हो रही है। 12वीं की परीक्षा सात मार्च से एवं दसवीं की 14 मार्च से शुरू हो रही है। परीक्षा के दौरान गोपनीयता एवं पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बोर्ड ने ये निर्णय लिया है। इससे पहले बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी करने वाले वीक्षक एवं पर्यवेक्षक के मोबाइल रखने पर पहले से ही पाबंदी थी, इस बार ये पाबंदी केंद्राधीक्षकों पर लागू हो जाएगी। केंद्राधीक्षक केवल बेसिक ट
आखिरी वक्त में इस हाल में मिली थी ये एक्ट्रेस, जानिए कैसे हो गया था एड्स

आखिरी वक्त में इस हाल में मिली थी ये एक्ट्रेस, जानिए कैसे हो गया था एड्स

Entertainment
हैदराबाद. निशा नूर। यह नाम सुनने में भले ही अनसुना लग रहा हो, लेकिन 80 के दशक में साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में बहुत पॉपुलर था। निशा की पॉपुलैरिटी कुछ ऐसी थी कि रजनीकांत और कमल हासन जैसे बड़े स्टार्स भी उनके साथ काम करना चाहते थे। कुछ फिल्मों में निशा इन स्टार्स के साथ दिखी भी हैं। हालांकि, इतनी पॉपुलर होने के बाद भी निशा को जो मुकाम मिलना चाहिए था, वो नहीं मिला। प्रोड्यूसर ने प्रॉस्टिट्यूशन में धकेला...कहा जाता है कि निशा को एक प्रोड्यूसर ने धोखे से प्रॉस्टिट्यूशन में धकेल दिया था। इसके बाद हुआ यह कि इंडस्ट्री के सभी लोग उनसे दूर हो गए। जब कोई चारा नहीं दिखा तो निशा ने हमेशा के लिए इंडस्ट्री छोड़ दी। लेकिन इसके बाद उनके हालात और खराब हो गए। इंडस्ट्री से कोई उन्हें देखने तक नहीं आया।जिंदगी और मौत की जंग लड़ते सड़क पर मिली थीं निशाधीरे-धीरे निशा के आर्थिक हालात बिगड़ते गए।
बच्चों को भी हो रही है टाइप टू डायबिटीज, जानें इसके बारे मेें

बच्चों को भी हो रही है टाइप टू डायबिटीज, जानें इसके बारे मेें

Health
माता-पिता बच्चों के खानपान पर विशेष ध्यान दें। उन्हें दुलार देने के चक्कर में अत्यधिक मात्रा में जंकफूड न खिलाएं। शरीर में जब पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनता या अपेक्षित काम नहीं करता तो कोशिकाओं में पहुंचने के बजाय ग्लूकोज रक्त में ही रुक जाता है। जब रक्त में शुगर का स्तर बढ़ जाता है तो इसे डायबिटीज कहते हैं। यह दो तरह की होती है। टाइप वन डायबिटीज यानी इंसुलिन का बनना बंद हो जाना और टाइप टू डायबिटीज यानी इंसुलिन बनना व इसके काम करने की क्षमता कम हो जाती है। बढ़ रहा है खतरा - एक-दो दशक पहले बच्चों को टाइप वन डायबिटीज ही होती थी लेकिन अब उन्हें टाइप टू डायबिटीज भी होने लगी है। यह वंशानुगत रोग है लेकिन मोटे, आलसी या खानपान में लापरवाह बच्चों को टाइप टू डायबिटीज का खतरा ज्यादा होता है। विशेषज्ञ की राय - बच्चे को अधिक प्यास लगे, बार-बार पेशाब आए, बिस्तर गीला करे, खूब खाए लेकिन वजन घटे तो जांच करवाए
हो जाएं सावधान, इस वजह से शरीर को हो सकता है लकवा

हो जाएं सावधान, इस वजह से शरीर को हो सकता है लकवा

Health
हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) आधुनिक जीवनशैली में एक बड़ी समस्या बन गया है। पहले जहां हाई ब्लडप्रेशर की समस्या 40 साल की उम्र के बाद होती थी। वहीं अब ये युवाओं को भी होने लगी है। खराब दिनचर्या, लगातार तनाव, फास्ट फूड, शारीरिक श्रम का अभाव इस बीमारी के लिए जिम्मेदार हैं। कई मामलों में आनुवांशिकता के कारण भी हाई ब्लडप्रेशर की समस्या कम उम्र में हो सकती है। इसके प्रमुख लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर आना, सीने में दर्द, सांस फूलना, घबराहट, चिड़चिड़ापन, अत्यधिक पसीना आना आदि शामिल हैं। हाई ब्लड प्रेशर के अत्यधिक बढ़ने पर लकवा या बे्रन हेमरेज जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। होम्योपैथी दवाएं ब्लडप्रेशर के इलाज में प्रभावी हैं। इस चिकित्सा पद्धति में कम उम्र के लोगों में ब्लडप्रेशर को जड़ से ठीक किया जा सकता है और अधिक उम्र के लोगों में आसानी से नियंत्रित रखा जा सकता है। हाई ब्लडप्रेशर में काम आन

MWC 2019: Nokia 9 PureView, Sony Xperia XZ4 के अलावा ये 5G स्मार्टफोन्स हो सकते हैं पेश

Indian Technology
दुनिया की जानी-मानी मोबाइल और इलेक्ट्रिनक डिवाइस बनाने वाली दक्षिण कोरियाई कंपनी Samsung इस मेगा शो में कोई बड़ी घोषणा नहीं करने वाली है Jagran Hindi News - technology:tech-news
जिनके इशारों पर लोग सड़कों पर आते हैं, शहर बंद हो जाते हैं, पढ़िए उनका सच, अलगाववादी युवाओं से पत्थर फिंकवाते हैं, अपने बच्चों को विदेशों में पढ़ाते हैं

जिनके इशारों पर लोग सड़कों पर आते हैं, शहर बंद हो जाते हैं, पढ़िए उनका सच, अलगाववादी युवाओं से पत्थर फिंकवाते हैं, अपने बच्चों को विदेशों में पढ़ाते हैं

Delhi
दिल्ली( उदय भास्कर/गोविंद चौहान)जिन कश्मीरी अलगाववादी नेताओं के एक इशारे पर लोग सड़कों पर उतर आते हैं। शहर बंद कर देते हैं। पत्थर बरसाते हैं, उनके बच्चे और नाते-रिश्तेदार कश्मीर में नहीं रहते। विदेशों में रहते हैं तमाम सुख-सुविधाओं के साथ। कुछ के परिवार और बच्चे मलेशिया, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में हैं। कइयों के बच्चे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में रहकर या तो पढ़ाई कर रहे हैं या फिर ऊंची नौकरी। अलगाववादी नेताओं की नीयत पर ऐसा ही सवाल उठाया है जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के संस्थापकों में से एक हाशिम कुरैशी के बेटे जुनैद कुरैशी ने। उन्होंने पूछा है कि अलगाववादी दूसरों के बच्चों को बंदूक उठाकर मरने के लिए क्यों उकसाते हैं? जुनैद उस हाशिम कुरैशी का बेटा है, जो 30 जनवरी 1971 को इंडियन एयर लाइंस का विमान हाईजैक कर लाहौर ले गया था। वहां यात्रियों को छोड़ दिया गया था पर विमान मे
गेहूं के खेतों में बारिश का पानी जमा होने से हो रहा है नुकसान

गेहूं के खेतों में बारिश का पानी जमा होने से हो रहा है नुकसान

Punjab
सिटी रिपोर्टर | श्री माछीवाड़ा साहिब पिछले कुछ दिनों से माछीवाड़ा इलाके में पड़ रही भारी बारिश कारण सैकड़ों एकड़ फसल आलू की तबाह तो हो ही चुकी है और अब यह बारिश का पानी गेहूं की फसल पर भी कहर ढा रहा है और खेतों में जमा पानी को निकालने व फसल को बचाने के लिए किसान मशक्कत करते दिखाई दे रहे हैं। ढाहा क्षेत्र जहां आलू की फसल ज़्यादा होती है वहां हालात ये हैं कि भारी बारिश कारण पककर तैयार हुई आलू की फसल बिल्कुल तबाह हो गई, जिस कारण किसानों का भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। वहां नई ताजी बीजी आलू की फसल तो इस पानी में बिल्कुल ही डूब गई है। पहले किसान बारिश को गेहूं की फसल के लिए लाभदायक बताते थे, परंतु अब ज़्यादा बारिश पड़ने से माछीवाड़ा बेट क्षेत्र के गांवों में गेहूं के खेतों में पानी जमा हो गया, जिस कारण इस फसल की जड़ें पीली पड़ने लग गईं जो सीधे तौर पर झाड़ को प्रभावित करें
मंत्री जी! अगर सियासी रोटियां सेंकने आए हो तो नहीं चलेगा

मंत्री जी! अगर सियासी रोटियां सेंकने आए हो तो नहीं चलेगा

Punjabi Politics
तरनतारन/चोहला साहिब| शहीद सुखजिंदर के अंतिम संस्कार में पहुंचे केंद्रीय राज्य मंत्री विजय गोयल उस वक्त मुश्किल में फंस गए, जब गांव के ही एक पूर्व फौजी उन पर भड़क गए। गोयल जब परिवार वालों को भरोसा दे रहे थे कि केंद्र सरकार उनकी हर संभव मदद करेगी और जल्द ही दुश्मनों के खिलाफ कड़े कदम उठाएगी। ये सुन पूर्व फौजी जसविंदर सिंह भड़क गया और मंत्री से बोला-सियासी रोटियां सेंकने आए हो तो ये नहीं चलेगा। जसविंदर ने सुरक्षा घेरा तोड़कर आगे बढ़ने की भी कोशिश की लेकिन उसे रोक लिया गया। ये देख गोयल ने अपने साथ आए नेताओं और सुरक्षा कर्मियों को फटकार लगाई। पूर्व फौजी जसविंदर ने मंत्री से शहीद के नाम पर स्टेडियम और गेट बनाने की मांग की। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Tarantaran News - respected minister if the political rotis come
गजल गायक जगजीत सिंह चाहते थे शायरी ऐसी हो जो आम लोगों को भी समझ आए: नज़ीर

गजल गायक जगजीत सिंह चाहते थे शायरी ऐसी हो जो आम लोगों को भी समझ आए: नज़ीर

Punjab
जालंधर | आर्टिस्ट गॉड गिफ्टेड हैं। कोई उन्हें बना नहीं सकता। किसी बड़े शायर के बच्चे शायर नहीं बने। अगर बना पाते तो वे भी शायर होते। मेरे शब्दों में - गॉड गिफ्टेड मतलब जिन लोगों को एक्सट्रा ऑर्डिनरी सेंसेटिव बनाया हो। ये कहना है जगजीत सिंह, लता मंगेशकर के लिए गजलें लिख चुके नज़ीर बाक़री का। वे शनिवार को केएल सहगल में हो रहे ‘शाम-ए-फाकिर’ में हिस्सा लेने आए हैं। उन्होंने बताया- जब दुख, दर्द या खुशी चर्म सीमा पर हो, तभी आदमी आर्टिस्ट बन सकता है। बहुत से शायर हालात के मारे होते हैं। वे जब तकलीफ ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पाते, तो लिखना, गाना बनाना या तस्वीर बनाना शुरू कर देते हैं। नज़ीर बाक़री अमेरिका, पाकिस्तान, बांग्लादेश और लंदन अादि देशों में मुशायरे में हिस्सा ले चुके हैं। बोले- दुख, दर्द या खुशी चर्म सीमा पर हो तब बनता है आर्टिस्ट जगजीत सिंह के साथ जुड़ी अपनी याद को सांझ